उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से संचालित चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण, मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि, रक्तदान और जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा से जुड़े विषयों पर बात की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दावा किया कि करीब साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिस इंसेफेलाइटिस को लेकर अभिभावकों में चिंता रहती थी, अब वह स्थिति समाप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने रक्त की जरूरत और उपलब्धता के बीच अंतर का उल्लेख करते हुए स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आईएमए द्वारा संचालित चैरिटेबल ब्लड सेंटर का फीता काटकर उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने सेंटर का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम में आईएमए गोरखपुर के पदाधिकारी, चिकित्सक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने बताया कि चैरिटेबल ब्लड सेंटर की क्षमता 400 यूनिट है। उन्होंने कहा कि सेंटर का उद्देश्य रक्त की कमी के कारण किसी मरीज को परेशानी न होने देना है। मुख्यमंत्री ने आईएमए की ओर से किए जा रहे सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्था ने पहले निशुल्क ओपीडी शुरू की और अब चैरिटेबल ब्लड सेंटर की शुरुआत की है। उनके अनुसार, संस्थाओं की सामाजिक भूमिका का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उनकी विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब साढ़े नौ वर्ष पहले इस बीमारी से बच्चों के प्रभावित होने को लेकर अभिभावकों में चिंता रहती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह चिंता खत्म हो चुकी है और उन्होंने इंसेफेलाइटिस को माफिया और मच्छर की तरह समाप्त होने की बात कही। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज की पुरानी स्थिति का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, उस समय बीआरडी मेडिकल कॉलेज पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र था और कई बार एक बेड पर चार-चार मरीज भर्ती रहते थे। उन्होंने इंसेफेलाइटिस वार्ड में सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं उपलब्ध हैं और यह इंसेफेलाइटिस सहित विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
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मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का आंकड़ा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। उन्होंने गोरखपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना के साथ ही आसपास के कई जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू होने का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। उन्होंने प्रदेश में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों के संचालन की भी बात कही। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की सीटों की संख्या 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो गई है, जबकि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा की सीटों में भी वृद्धि हुई है। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है। उन्होंने गोरखपुर में डायलिसिस सुविधा के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले मरीजों को डायलिसिस के लिए लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, जबकि अब गोरखपुर में यह सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां समय के साथ ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर भी जिला अस्पतालों में निशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने का काम शुरू किया गया है।
चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में रक्तदान को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अस्पतालों का बुनियादी ढांचा, दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक रक्तदान को जरूरतमंद व्यक्ति की मदद से जोड़ते हुए चिकित्सकों से लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से समय-समय पर रक्तदान के लिए जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति हमेशा पर्याप्त नहीं हो पाती। ऐसे में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी है, क्योंकि इससे संक्रमण का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने चिकित्सकों से ऐसी गतिविधियों की जानकारी शासन और प्रशासन तक पहुंचाने तथा जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की। इस विषय में मुख्यमंत्री का जोर सुरक्षित और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने पर रहा।
मुख्यमंत्री ने आईएमए गोरखपुर के सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आईएमए ने वर्ष 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए की ओर से कार्यालय के लिए जमीन की मांग किए जाने पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में सहयोग किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही। उन्होंने कहा कि इसी भूखंड का उपयोग चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित करने के लिए किया गया है। आईएमए के अनुसार, यह ब्लड सेंटर पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में 10 बेड के अस्पताल की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से इसे प्रारंभिक चरण में ही 100 बेड का बनाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस चिकित्सालय में अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू जैसी सुविधाओं का संचालन किया गया। उन्होंने ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सेवाओं के विकास का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम किए जाने की जानकारी दी। इन पहलों का उल्लेख मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक, चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञता के विस्तार के संदर्भ में किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश में पहले डॉक्टरों के सामने आने वाली सुरक्षा संबंधी घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय गोरखपुर में डॉक्टरों के अपहरण, रंगदारी मांगने, धमकी भरे फोन और चिकित्सकों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ चिकित्सकों के साथ उन्हें भी आंदोलन करना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्तमान में गोरखपुर और प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी तथा नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने गोरखपुर को मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित होने की बात कही। उनके अनुसार, आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर की क्षमता 400 यूनिट है और इसका उद्देश्य रक्त की उपलब्धता में सहयोग करना है। समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने किया, जबकि संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया।
कार्यक्रम में एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, आईएमए गोरखपुर के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अवधेश अग्रवाल सहित कई चिकित्सक और अन्य लोग मौजूद रहे। चैरिटेबल ब्लड सेंटर के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री की नजर परिसर में मौजूद एक बच्ची पर पड़ी। उन्होंने बच्ची से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और उसे आशीर्वाद दिया।