ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद भारत की प्रतिक्रिया को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद सामने आए हैं। जहां पार्टी नेतृत्व केंद्र सरकार पर ‘चुप्पी’ का आरोप लगा रहा है, वहीं वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी और शशि थरूर ने सरकार के सतर्क रुख का समर्थन किया है।
कांग्रेस के आधिकारिक रुख से अलग जाते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि भारत को इस संघर्ष में “रणनीतिक स्वायत्तता” बनाए रखनी चाहिए। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की जटिल परिस्थितियों में भारत की भूमिका सीमित है और प्राथमिकता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा जरूरतों को दी जानी चाहिए।
तेवारी के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में लगभग 48 लाख भारतीय रहते हैं और भारत की ऊर्जा आपूर्ति भी इस क्षेत्र पर निर्भर है, ऐसे में सरकार का संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख उचित है।
इसी तरह शशि थरूर ने भी अपने लेख में सरकार की संयमित नीति का समर्थन करते हुए कहा कि व्यापक संघर्ष पर चुप्पी को सैन्य कार्रवाई के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर संवेदना जताने की बात कही।
वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री की “चुप्पी” पर सवाल उठाए हैं और स्पष्ट आधिकारिक रुख की मांग की है। भारत सरकार ने अब तक स्थिति पर संयम बरतते हुए सभी पक्षों से तनाव कम करने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। मध्य पूर्व संकट पर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग रुख सामने आने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है।