पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब तेल बाजार से राहत के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
रविवार देर रात ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.9 प्रतिशत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी क्रूड लगभग 4.8 प्रतिशत गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। यह मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी। कुछ वाणिज्यिक जहाजों को इस मार्ग से गुजरने के लिए अतिरिक्त लागत भी उठानी पड़ रही थी, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ था।
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर देश के आयात बिल और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो ईंधन की लागत में कमी आने की संभावना बढ़ सकती है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले समय में तेल और गैस की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में किसी संभावित कटौती को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।