650 करोड़ के दिल्ली स्वास्थ्य घोटाले में पहली बर्खास्तगी, डाटा असिस्टेंट की नौकरी गई; दो कर्मचारी भी सस्पेंड

01 Jul 2026

दिल्ली के चर्चित 650 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य घोटाले की जांच के बीच स्वास्थ्य विभाग ने पहली बड़ी विभागीय कार्रवाई करते हुए एक डाटा असिस्टेंट की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डाटा असिस्टेंट सुमित सिंह को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है, जबकि महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) कार्यालय में तैनात दो जूनियर असिस्टेंट को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) से जुड़े मामलों की जांच के दौरान की गई है।

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार बर्खास्त किए गए कर्मचारी को विभाग से जुड़े सभी सरकारी दस्तावेज, फाइलें, लैपटॉप, पहचान पत्र और अन्य आधिकारिक सामग्री तत्काल जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक सुमित सिंह लंबे समय से खरीद और आपूर्ति से जुड़े कार्यों में तैनात थे और उनकी भूमिका की जांच की जा रही थी।

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सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवाओं और चिकित्सा सामग्री की खरीद से जुड़े कुछ निजी सप्लायरों के साथ संबंधित कर्मचारी के संबंधों की प्रकृति क्या थी और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी भूमिका कितनी रही। जांच का फोकस खरीद से जुड़े रिकॉर्ड, फाइलों और निर्णय प्रक्रिया पर भी है।

इसी कड़ी में विभाग ने डीजीएचएस कार्यालय में कार्यरत दो जूनियर असिस्टेंट को भी निलंबित किया है। हालांकि विभाग ने जांच प्रभावित न हो, इसलिए दोनों कर्मचारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।

स्वास्थ्य विभाग में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इस मामले में पहले भी कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इससे पहले केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के स्टोर से जुड़े पांच फार्मासिस्ट और दो अधिकारियों को निलंबित किया गया था।

इसके अलावा पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. वत्सला अग्रवाल सहित दो अधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) की जांच के दायरे में हैं।

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जांच एजेंसियां दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और फाइलों की विस्तार से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का प्रयास यह पता लगाना है कि खरीद प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि विभागीय स्तर पर भी रिकॉर्ड की समीक्षा जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच के समानांतर स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार केंद्रीय खरीद एजेंसी और उससे जुड़े विभिन्न कार्यालयों में तैनात 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों का हाल के दिनों में तबादला किया गया है।

सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। वहीं एंटी करप्शन ब्रांच, विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियां मामले की जांच जारी रखे हुए हैं।