दिल्ली में 650 करोड़ रुपये के दवा घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी ने अब दवाओं की अस्पतालों तक वास्तविक आपूर्ति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में बड़ी मात्रा में दवाओं की अस्पतालों तक आपूर्ति दर्ज की गई, लेकिन वास्तविक रूप से उनका बड़ा हिस्सा अस्पतालों में नहीं पहुंचा।
आप के अनुसार, करीब 70 से 80 प्रतिशत दवाओं की आपूर्ति केवल सरकारी फाइलों में दर्ज दिखाई गई, जबकि वास्तविक तौर पर अस्पतालों तक लगभग 20 से 30 प्रतिशत दवाएं ही पहुंचीं। पार्टी ने इस मामले में दवाओं की खरीद के साथ-साथ उनके स्टॉक, वितरण और अस्पतालों तक पहुंचने की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की है।
आम आदमी पार्टी की ओर से शनिवार को जारी बयान में दिल्ली सरकार के कथित दवा घोटाले को लेकर नए आरोप लगाए गए। पार्टी का कहना है कि मामला केवल दवाओं की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि खरीद के बाद अस्पतालों तक उनके वितरण को लेकर भी सवाल सामने आ रहे हैं।
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आप ने आरोप लगाया कि करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की दवाओं को 400 करोड़ रुपये में खरीदा गया। पार्टी के मुताबिक, अब इन दवाओं की वास्तविक आपूर्ति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। आप का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आपूर्ति और अस्पतालों में उपलब्ध वास्तविक दवाओं के बीच अंतर की जांच की जानी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के अनुसार, सरकारी दस्तावेजों में करीब 70 से 80 प्रतिशत दवाओं को अस्पतालों तक पहुंचा हुआ दिखाया गया। हालांकि, पार्टी का दावा है कि वास्तविक रूप से अस्पतालों तक केवल 20 से 30 प्रतिशत दवाएं ही पहुंचीं। यह आरोप दवाओं की खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर केंद्रित है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि रिकॉर्ड में दवाओं की आपूर्ति दर्ज है, तो अस्पतालों में उनकी वास्तविक उपलब्धता की स्थिति क्या थी। इन आरोपों के आधार पर आप ने दवा खरीद के साथ स्टॉक और वितरण प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
आम आदमी पार्टी ने अपने आरोपों के समर्थन में सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल का हवाला दिया है। पार्टी के अनुसार, अस्पताल में लाखों रुपये मूल्य की दवाओं की आपूर्ति रिकॉर्ड में दर्ज है। हालांकि, आप का दावा है कि मौके पर उन दवाओं की मौजूदगी नहीं मिली। पार्टी ने इसी आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आपूर्ति और अस्पताल में उपलब्ध स्टॉक का मिलान कराने की जरूरत बताई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अस्पताल की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दवाओं की खरीद प्रक्रिया के साथ-साथ उनके स्टॉक और वितरण व्यवस्था की भी जांच जरूरी है। उनके अनुसार, यदि सरकारी रिकॉर्ड में दवाओं की आपूर्ति दर्ज है और अस्पतालों में उनकी उपलब्धता अलग स्थिति दिखाती है, तो इस अंतर की जांच की जानी चाहिए। सौरभ भारद्वाज ने इसी संदर्भ में दवा खरीद से लेकर अस्पतालों तक वितरण की पूरी प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
आम आदमी पार्टी ने दवा मामले में पहले खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। अब पार्टी ने दवाओं की सप्लाई को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की है। पार्टी के मुताबिक, करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की दवाओं को 400 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का आरोप पहले से ही मामले का हिस्सा है। इसके साथ अब यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि खरीदी गई दवाओं में से कितनी मात्रा वास्तव में अस्पतालों तक पहुंची। आप का कहना है कि खरीद मूल्य, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आपूर्ति, अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक और वास्तविक वितरण के आंकड़ों का मिलान किया जाना चाहिए।
दवाओं की खरीद के बाद उनका अस्पतालों तक पहुंचना और उपलब्ध होना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आप द्वारा लगाए गए आरोप इसी वितरण प्रक्रिया से जुड़े हैं। पार्टी का दावा है कि यदि रिकॉर्ड में दर्ज आपूर्ति और अस्पतालों में मौजूद दवाओं की मात्रा अलग-अलग है, तो इसकी वजह सामने आनी चाहिए। इसी को आधार बनाकर आप ने खरीद प्रक्रिया के साथ स्टॉक और वितरण व्यवस्था की जांच की मांग की है।
आप के आरोपों के बाद मामले में सरकारी रिकॉर्ड और अस्पतालों में मौजूद वास्तविक दवाओं के स्टॉक के मिलान का मुद्दा उठाया गया है। इस प्रक्रिया में खरीद से संबंधित रिकॉर्ड, अस्पतालों को भेजी गई दवाओं का विवरण और अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी की तुलना किए जाने की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज दवाओं की आपूर्ति और अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं के बीच कोई अंतर है या नहीं।
650 करोड़ रुपये के कथित दवा घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों में अब दो प्रमुख बिंदु सामने आए हैं। पहला दवाओं की खरीद कीमत से जुड़ा है और दूसरा खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और वितरण से।
आप का आरोप है कि करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की दवाओं को 400 करोड़ रुपये में खरीदा गया। इसके अलावा पार्टी ने दावा किया है कि 70 से 80 प्रतिशत दवाओं की आपूर्ति केवल कागजी रिकॉर्ड में दिखाई गई, जबकि वास्तविक आपूर्ति 20 से 30 प्रतिशत तक रही। पार्टी ने इन दोनों पहलुओं की जांच की मांग की है।
इस रिपोर्ट में दिए गए दवा खरीद और अस्पतालों तक आपूर्ति से जुड़े आंकड़े आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या दिल्ली सरकार की ओर से इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
इसलिए 70-80 प्रतिशत दवाओं की कथित कागजी सप्लाई, करीब 100 करोड़ रुपये की दवाओं को 400 करोड़ रुपये में खरीदे जाने और सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में रिकॉर्ड में दर्ज दवाओं की मौजूदगी नहीं मिलने संबंधी दावों को पार्टी के आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।