दिल्ली पुलिस की दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर थाना पुलिस ने 26 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़े चार मामलों का खुलासा करते हुए 10 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में साइबर ठगी के कथित मास्टरमाइंड से लेकर बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले सदस्य शामिल हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान झारखंड के जामताड़ा और देवघर के साथ-साथ एनसीआर में छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा। उनके कब्जे से कई डिजिटल उपकरण और ठगी की रकम से खरीदी गई एक महिंद्रा थार रॉक्स भी बरामद की गई है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों को बैंक अधिकारी बनकर कॉल या संदेश भेजते थे और उन्हें एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल करता, आरोपी उसके फोन तक रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते और बैंक से जुड़े ओटीपी तथा अन्य संवेदनशील जानकारी अपने नियंत्रण में ले लेते थे।
दक्षिण-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि जांच की शुरुआत 18 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता एक बुजुर्ग थे, जिन्हें बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया गया था।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित को एक APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने के लिए कहा। फाइल इंस्टॉल होते ही मोबाइल फोन की क्लोनिंग कर ली गई। इसके बाद बैंक खातों से जुड़े ओटीपी और अन्य आवश्यक जानकारियां सीधे आरोपियों तक पहुंचने लगीं। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने कई ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 18 लाख रुपये निकाल लिए।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और मनी ट्रेल का विश्लेषण किया। जांच के आधार पर पुलिस टीम झारखंड के जामताड़ा पहुंची, जहां से इस गिरोह के कथित मास्टरमाइंड मंजूर आलम को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने मेरठ में भी कार्रवाई की। यहां से पांच ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले 'म्यूल अकाउंट' उपलब्ध कराने का आरोप है। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
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पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान सामने आए तीन अन्य साइबर ठगी के मामलों में भी कार्रवाई की गई। इन मामलों में शामिल चार आरोपियों को जामताड़ा से गिरफ्तार किया गया। इस तरह चार अलग-अलग मामलों में कुल 10 आरोपियों को पकड़ा गया है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा साइबर ठगी की अन्य घटनाओं से उनका कोई संबंध है या नहीं।
साइबर अपराधी पिछले कुछ समय से APK फाइलों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। सामान्य ऐप की तरह दिखाई देने वाली इन फाइलों में हानिकारक सॉफ्टवेयर (मैलवेयर) छिपा हो सकता है। उपयोगकर्ता के इन्हें इंस्टॉल करते ही मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां अपराधियों के नियंत्रण में पहुंच सकती हैं।
इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग बैंकिंग ऐप, ओटीपी, मैसेज और अन्य संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों से अनजान लिंक या APK फाइल डाउनलोड न करने की अपील करती रही हैं।