राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीनों पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ अब कार्रवाई पहले से कहीं अधिक तेज और व्यवस्थित होगी। नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करते हुए डीडीए ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर कहीं भी अवैध निर्माण या अतिक्रमण मिलने पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकतम 72 घंटे के भीतर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
यह नई व्यवस्था उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस' नीति के बाद लागू की गई है। हाल ही में डीडीए की सलाहकार परिषद की बैठक में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण और भू-माफियाओं से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
नई एसओपी के तहत राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी के लिए 14 उड़न दस्तों का गठन किया गया है। इसके अलावा अवैध निर्माणों को हटाने के लिए चार त्वरित प्रतिक्रिया टीमें बनाई गई हैं। उड़न दस्तों की जिम्मेदारी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करना और शुरुआती स्तर पर ही किसी भी अवैध निर्माण या अतिक्रमण की पहचान करना होगी।
डीडीए का उद्देश्य अवैध निर्माणों को शुरुआती चरण में ही चिन्हित कर समय रहते कार्रवाई करना है, ताकि सरकारी जमीनों पर स्थायी कब्जे की स्थिति न बनने पाए।
नई व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। अवैध निर्माणों की पहचान के लिए ड्रोन सर्वे सहित आधुनिक निगरानी प्रणाली का सहारा लिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान मिलने वाले प्रत्येक उल्लंघन का रिकॉर्ड तारीख, समय और जियो-टैग की गई तस्वीरों के साथ तैयार किया जाएगा।
डीडीए के अनुसार, इन रिपोर्टों को वेकेंट लैंड मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे खाली सरकारी जमीनों का रिकॉर्ड वास्तविक समय में अपडेट होता रहेगा। इससे विभिन्न क्षेत्रों में जमीन की स्थिति की लगातार निगरानी संभव होगी।
नई एसओपी के अनुसार, अवैध निर्माण की पहचान और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को सौंपी जाएगी। इन टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि चिन्हित अतिक्रमण के खिलाफ 72 घंटे के भीतर कार्रवाई पूरी की जाए।
कार्रवाई के बाद उसी दिन संबंधित अधिकारियों को जियो-टैग की गई 'कार्रवाई से पहले' और 'कार्रवाई के बाद' की तस्वीरों सहित पूरी रिपोर्ट जमा करनी होगी, ताकि कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।
डीडीए ने नई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ध्वस्तीकरण अभियान की वीडियोग्राफी अनिवार्य की है। कार्रवाई पूरी होने के बाद संबंधित भूमि पर डीडीए के स्वामित्व का बोर्ड भी लगाया जाएगा, ताकि दोबारा अवैध कब्जे की संभावना को कम किया जा सके। इसके साथ ही कार्रवाई से जुड़े सभी दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया आसान हो सके।
नई एसओपी में इंजीनियरिंग, भूमि प्रबंधन और बागवानी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। डीडीए का कहना है कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल से अवैध कब्जों के मामलों में कार्रवाई की गति बढ़ेगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।