दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की गई साइबर ठगी के मामले में चार आरोपियों को पंजाब और राजस्थान से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में मुनीरका एन्क्लेव निवासी भारतीय सेना के एक रिटायर्ड कर्नल से 15.50 लाख रुपये की ठगी की गई थी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को म्यूल या चालू बैंक खाते उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते थे। पुलिस के अनुसार, जिस लाभार्थी बैंक खाते में ठगी की रकम पहुंची, वह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 17 शिकायतों से जुड़ा पाया गया। इन शिकायतों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन दर्ज होने की बात पुलिस ने कही है।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को 15 अप्रैल 2026 को एक फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस के आदेश पर उनका टेलीफोन नंबर बंद किया जा सकता है। इसके बाद उन्हें दूसरे नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा गया।
पुलिस के अनुसार, दूसरे नंबर पर मौजूद व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और पीड़ित से कहा कि उनके विवरण का इस्तेमाल मुंबई में एक अवैध बैंक खाता खोलने के लिए किया गया है। उस खाते को मनी लॉन्ड्रिंग, निवेश धोखाधड़ी और आतंकवादी फंडिंग से जोड़कर बताया गया।
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जांच के अनुसार, आरोपियों ने मामले को वास्तविक दिखाने के लिए पीड़ित को फर्जी दस्तावेज भेजे। इनमें फर्जी प्रवर्तन निदेशालय का गिरफ्तारी वारंट, अदालत से जुड़े दस्तावेज, अग्रिम जमानत से संबंधित कागज और बंबई हाईकोर्ट तथा भारतीय रिजर्व बैंक से संबंधित जाली संचार शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद पीड़ित और उनकी पत्नी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने की बात कही गई। लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव के बीच पीड़ित से उनकी संपत्तियों से संबंधित जानकारी ली गई और भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देश बताकर 15.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए।
पुलिस के मुताबिक, शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से मिली। मामले में 19 अप्रैल 2026 को साइबर थाना, दक्षिण-पश्चिम जिला, दिल्ली में ई-एफआईआर संख्या 165/26 दर्ज की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 318(4), 319 और 340 के तहत केस दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
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दिल्ली पुलिस ने बताया कि जांच टीम ने रकम के लेनदेन, लाभार्थी खातों, डिजिटल गतिविधियों और तकनीकी निगरानी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पुलिस के अनुसार, ठगी की 15.50 लाख रुपये की रकम लुधियाना स्थित एक बैंक खाते में पहुंची थी। यह खाता आरोपी सरबजीत के नाम पर बताया गया है।
जांच में पुलिस के अनुसार, सरबजीत ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने अपना चालू खाता सूरज को दिया था। सूरज सिंगल बैंक कर्मचारी संदीप के संपर्क में था। इसके बाद सूरज ने यह खाता नरेश उर्फ लकी को उपलब्ध कराया, जिससे उसकी पहचान टेलीग्राम के माध्यम से हुई थी। पुलिस का कहना है कि सरबजीत, सूरज और संदीप राजस्थान के जयपुर गए थे, जहां बैंक खाते की किट नरेश उर्फ लकी को सौंपी गई।
पुलिस के अनुसार, इस सुराग के आधार पर जांच टीम ने राजस्थान में छापेमारी कर नरेश उर्फ लकी को पकड़ा। पूछताछ में उसने बताया कि उसने सूरज से टेलीग्राम के जरिए चालू बैंक खाता हासिल किया और उसे विदेश से संचालित साइबर ठगी करने वाले लोगों तक पहुंचाया।
पुलिस के मुताबिक, नरेश की भूमिका घरेलू स्तर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों और कंबोडिया तथा संयुक्त अरब अमीरात/दुबई से जुड़े साइबर ठगी ऑपरेटरों के बीच संपर्क के रूप में सामने आई। जांच एजेंसी इस नेटवर्क की पूरी कड़ी, अंतिम लाभार्थियों और धन के पूरे प्रवाह की जानकारी जुटाने के लिए आगे की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 38 वर्षीय सरबजीत लुधियाना का निवासी है और जिस चालू बैंक खाते में रिटायर्ड कर्नल से ठगी की गई 15.50 लाख रुपये की राशि पहुंची, वह खाता उसके नाम पर था। पुलिस का आरोप है कि उसने इस खाते को साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने की अनुमति दी और इसे बिचौलियों के जरिए आगे पहुंचाया।
पुलिस के अनुसार, 30 वर्षीय सूरज लुधियाना का निवासी है और बैंक खाते जुटाकर उन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाने का काम करता था। पुलिस ने बताया कि उसने नरेश उर्फ लकी से टेलीग्राम के जरिए संपर्क किया और खाता तथा संबंधित बैंक किट उसे उपलब्ध कराई।
पुलिस के अनुसार, 32 वर्षीय संदीप भी लुधियाना का निवासी है और उस बैंक में काम करता था जो खातों से संबंधित सेवाएं प्रदान करता था। जांच के मुताबिक, उसने बैंकिंग क्षेत्र में अपने संपर्क और जानकारी का इस्तेमाल खाते उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में मदद के लिए किया।
पुलिस के अनुसार, राजस्थान के सीकर निवासी नरेश उर्फ लकी ने सूरज से टेलीग्राम के माध्यम से खाते हासिल किए। जांच में उसकी भूमिका घरेलू स्तर पर खाते उपलब्ध कराने वालों और कंबोडिया तथा संयुक्त अरब अमीरात/दुबई से जुड़े कथित साइबर ठगी ऑपरेटरों के बीच कड़ी के रूप में सामने आई।
जांच में पुलिस ने एक कमीशन आधारित मॉडल की जानकारी दी है। इसके तहत ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी जो अपने चालू बैंक खाते दूसरे लोगों को इस्तेमाल के लिए देने को तैयार हों। पुलिस के मुताबिक, इन खातों को कमीशन के बदले हासिल किया जाता था। इसके बाद खातों को अलग-अलग बिचौलियों के जरिए आगे बढ़ाया जाता था।
जांच के अनुसार, संदीप बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े संपर्कों के जरिए खाते उपलब्ध कराने में मदद करता था। सूरज स्थानीय स्तर पर खाते हासिल कर उन्हें आगे पहुंचाता था। नरेश उर्फ लकी टेलीग्राम के जरिए मिले संपर्कों के माध्यम से इन खातों को कथित रूप से विदेश से जुड़े साइबर ठगी ऑपरेटरों तक पहुंचाता था।
पुलिस का कहना है कि इन खातों का इस्तेमाल विभिन्न साइबर ठगी से हासिल रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था। मौजूदा मामले में रिटायर्ड सेना कर्नल से ठगी की गई रकम भी इसी लाभार्थी खाते में पहुंची।
जांच का एक अहम हिस्सा लाभार्थी बैंक खाते से जुड़ी शिकायतों का विश्लेषण रहा। दिल्ली पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के रिकॉर्ड की जांच में इस खाते से जुड़ी 17 शिकायतें मिलीं।
ये शिकायतें अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित बताई गई हैं। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में दर्ज धोखाधड़ी वाले लेनदेन की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंचती है।
पुलिस ने कहा है कि इन रिकॉर्ड से यह जांच आगे बढ़ाने में मदद मिली कि आरोपियों की भूमिका केवल मौजूदा 15.50 लाख रुपये की ठगी तक सीमित थी या वे व्यापक साइबर अपराध नेटवर्क के लिए लगातार बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद करने की जानकारी दी है। जांच एजेंसियां इन डिजिटल उपकरणों और संचार माध्यमों का विश्लेषण कर रही हैं। इसका उद्देश्य कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, खातों के इस्तेमाल और धन के लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाना है।
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के अनुसार, मामले की आगे की जांच जारी है। जांच में कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, अंतिम लाभार्थियों और रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई में दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस की एक विशेष टीम शामिल थी। टीम में एसआई सोमबीर, हेड कांस्टेबल जितेंद्र, हेड कांस्टेबल पुनीत, हेड कांस्टेबल मयूरपाल और हेड कांस्टेबल संदीप शामिल थे। टीम ने निरीक्षक प्रवेश कौशिक, प्रभारी, साइबर थाना, दक्षिण-पश्चिम जिला के निकट पर्यवेक्षण में और सहायक पुलिस आयुक्त, ऑपरेशन, दक्षिण-पश्चिम जिला संदीप घई की समग्र निगरानी में जांच की।