फुटपाथ पर बने ईवी चार्जिंग स्टेशन हटेंगे, दिल्ली में अब इन जगहों पर बनेंगे नए प्वाइंट

08 Aug 2026

दिल्ली में फुटपाथ पर बनाए गए ईवी चार्जिंग स्टेशनों को हटाने की तैयारी की जा रही है। इन स्टेशनों के कारण पैदल यात्रियों के आवागमन और सड़क यातायात में परेशानी की बात सामने आई है। सरकार अब ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उचित स्थानों की पहचान करने की दिशा में काम करने की बात कह रही है।

नई ईवी नीति 2026 के तहत दिल्ली में अगले चार वर्षों में ईवी चार्जिंग प्वाइंट की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 32,000 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रत्येक जिले में जमीन की पहचान करने की व्यवस्था की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था में मेट्रो और नगर निगम की पार्किंग, बाजारों और माल की निर्धारित पार्किंग, पेट्रोल पंप, बस डिपो तथा खाली पड़ी सरकारी जमीनों को चार्जिंग स्टेशनों के लिए संभावित स्थान के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है।

दिल्ली में ईवी को बढ़ावा देने के लिए पहले बनाई गई व्यवस्था के तहत कुछ चार्जिंग स्टेशन सड़कों के किनारे फुटपाथ पर स्थापित किए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे कई स्थानों पर पैदल चलने वाले लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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फुटपाथ पर चार्जिंग स्टेशन होने से पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध स्थान कम होने के साथ यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। ऐसे स्थानों पर वाहनों के खड़े होने से सड़क पर आवाजाही प्रभावित होने और दुर्घटना की आशंका भी बताई गई है। सरकार अब ऐसे चार्जिंग स्टेशनों की स्थिति की समीक्षा करने और गलत स्थान पर स्थापित स्टेशनों के संबंध में कार्रवाई करने की बात कह रही है।

दिल्ली में ईवी चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने की प्रक्रिया के तहत सितंबर 2022 में तत्कालीन सरकार ने लोक निर्माण विभाग की 20 सड़कों के किनारे 100 चार्जिंग प्वाइंट बनाने की अनुमति दी थी।

इनमें से कुछ चार्जिंग प्वाइंट सड़कों के फुटपाथ पर स्थापित किए गए। इसके बाद संबंधित स्थानों पर पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह और वाहन आवागमन को लेकर समस्या सामने आई।

फुटपाथ पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने को लेकर स्थान चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस समय चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भविष्य की जरूरतों और उचित स्थान चयन को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया।

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ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने एक जुलाई को नई ईवी नीति 2026 अधिसूचित की। नई नीति में अगले चार वर्षों के दौरान दिल्ली में ईवी चार्जिंग प्वाइंट की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान लक्ष्य के अनुसार चार वर्षों में चार्जिंग प्वाइंट की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 32,000 की जाएगी। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली के ईवी चार्जिंग नेटवर्क में बड़ी संख्या में नए प्वाइंट जोड़े जाने की योजना है। इसके साथ ही सरकार का जोर चार्जिंग प्वाइंट के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराने पर है, ताकि नए स्टेशन सड़क और पैदल आवागमन में बाधा न बनें।

नई नीति के अनुसार दिल्ली के प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी को राजस्व विभाग के साथ मिलकर चार्जिंग स्टेशनों के लिए जमीन की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है।

इस व्यवस्था के तहत उपलब्ध सरकारी और अन्य उपयुक्त स्थानों का सर्वे किया जाएगा। सरकार का कहना है कि चार्जिंग स्टेशनों के लिए भूमि की कमी नहीं होने दी जाएगी और चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इससे नए चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने से पहले स्थान की उपलब्धता और उपयोगिता पर ध्यान देने की व्यवस्था होगी। नई नीति के तहत ईवी चार्जिंग के लिए कई तरह के स्थानों के इस्तेमाल की योजना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

अनधिकृत कॉलोनियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी जरूरत के अनुसार चार्जिंग विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए यह ध्यान रखा जाएगा कि चार्जिंग स्टेशन लगाने से यातायात या पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल में एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि अब फुटपाथ पर चार्जिंग प्वाइंट नहीं बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि राजस्व विभाग सहित संबंधित विभाग सर्वे करके जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान की जाएगी। नई नीति के तहत जिलास्तर पर जमीन की पहचान की व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।

लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा है कि सड़कों के फुटपाथ पर बने चार्जिंग स्टेशनों को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने भी कहा है कि गलत स्थान पर लगाए गए चार्जिंग स्टेशन हटाए जाएंगे। साथ ही भविष्य में फुटपाथ पर इस तरह के चार्जिंग प्वाइंट स्थापित नहीं किए जाने को सुनिश्चित किया जाएगा। इससे मौजूदा चार्जिंग स्टेशनों की स्थिति की समीक्षा के साथ भविष्य में नए स्टेशनों के लिए स्थान चयन की प्रक्रिया पर भी जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली में कोई भी उपभोक्ता निजी या व्यावसायिक उपयोग के लिए ईवी चार्जिंग प्वाइंट स्थापित कर सकता है। इसके लिए बिजली वितरण कंपनियां यानी डिस्कॉम ईवी नीति में निर्धारित मानदंडों के पूरा होने और संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के बाद बिजली कनेक्शन प्रदान करती हैं। इस व्यवस्था में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए संबंधित विभागों की अनुमति और निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक होता है।

दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग ने ईवी चार्जिंग प्वाइंट के लिए बिजली की दरें भी निर्धारित की हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाई-टेंशन लाइन से कनेक्शन वाले ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए बिजली की दर चार रुपये प्रति यूनिट है। वहीं लो-टेंशन लाइन वाले कनेक्शनों के लिए यह दर 4.50 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। ईवी चार्जिंग नेटवर्क के संचालन में डिस्कॉम के साथ निजी कंपनियां और वेंडर भी शामिल हैं।

दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों के अलावा 12 निजी वेंडर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने और उनका संचालन करने का काम कर रहे हैं। लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और अन्य एजेंसियां आम तौर पर समझौते के आधार पर इन वेंडर्स को चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे समझौते सामान्य तौर पर 10 वर्ष के लिए किए जाते हैं। जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था एक रुपये प्रति यूनिट के राजस्व साझेदारी या किराये के आधार पर किए जाने की बात सामने आई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीएसईएस के बिजली वितरण क्षेत्र में 6,500 से अधिक ईवी चार्जिंग प्वाइंट हैं। वहीं टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड के क्षेत्र में 3,700 से अधिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद हैं। नई ईवी नीति 2026 में अगले चार वर्षों में दिल्ली में कुल चार्जिंग प्वाइंट की संख्या को 32,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2020 में तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार ने ईवी नीति घोषित की थी। उस समय दिल्ली को इलेक्ट्रिक वाहनों की राजधानी के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था।

इसके बाद चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए अलग-अलग स्थानों पर चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए गए। सितंबर 2022 में लोक निर्माण विभाग की 20 सड़कों के किनारे 100 चार्जिंग प्वाइंट लगाने की अनुमति भी दी गई।

अब नई ईवी नीति 2026 में सरकार ने चार्जिंग प्वाइंट की संख्या बढ़ाने के साथ उनके लिए उपयुक्त जमीन की पहचान पर भी जोर दिया है। नीति के तहत लक्ष्य केवल चार्जिंग प्वाइंट की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि ऐसे स्थान उपलब्ध कराना भी है जहां इनसे यातायात और पैदल आवागमन प्रभावित न हो।

नई व्यवस्था में चार्जिंग स्टेशन के लिए ऐसी जगहों को प्राथमिकता देने की योजना है जहां वाहन पहले से पार्क किए जाते हैं या जहां पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। मेट्रो और नगर निगम की पार्किंग, बाजारों की निर्धारित पार्किंग, पेट्रोल पंप और बस डिपो इसके प्रमुख संभावित स्थान हैं।

इसके अलावा खाली पड़ी सरकारी जमीन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सार्वजनिक स्थानों और अनधिकृत कॉलोनियों में भी आवश्यकता के अनुसार चार्जिंग विकल्प उपलब्ध कराने की बात नीति में कही गई है, लेकिन इसके लिए पैदल यात्रियों और यातायात को बाधित नहीं करने की शर्त रखी गई है।

नई नीति के अनुसार ईवी चार्जिंग नेटवर्क को अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। जिलास्तर पर जमीन की पहचान, संबंधित विभागों की अनुमति और बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया के बाद नए चार्जिंग प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे। इस व्यवस्था में राजस्व विभाग, जिलाधिकारी, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, परिवहन विभाग और बिजली वितरण कंपनियों सहित विभिन्न एजेंसियों की भूमिका होगी। दिल्ली में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को 10,000 से बढ़ाकर 32,000 प्वाइंट करने के लक्ष्य के साथ अब स्थान चयन को भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।