तीन दिन में दो सगी बहनों की मौत, दिल्ली में बढ़ रहे एच1एन1 के मामले

08 Aug 2026

एक परिवार, दो बच्चियां और महज तीन दिनों का अंतर। दिल्ली में एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच एक निजी अस्पताल में दो सगी बहनों की मौत का मामला सामने आया है। छोटी बहन, जिसकी उम्र तीन साल 11 महीने थी, में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर होती गई और 5 अगस्त की सुबह उसकी मौत हो गई।

परिवार के अनुसार, बड़ी बहन की मौत इससे करीब तीन दिन पहले हो चुकी थी। उसमें भी तेज बुखार और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण थे। हालांकि, बड़ी बहन में एच1एन1 संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इस मामले ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है जब दिल्ली में एच1एन1 के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीज पहुंच रहे हैं।

तीन साल 11 महीने की बच्ची को 3 अगस्त को गंभीर हालत में निजी अस्पताल लाया गया था। जांच में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई। बच्ची की स्थिति गंभीर थी। एमआरआई जांच में उसके मस्तिष्क में एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी (एएनईसी) के संकेत मिले। यह फ्लू के बाद बहुत कम मामलों में सामने आने वाली गंभीर स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क प्रभावित हो सकता है। डॉक्टरों ने बच्ची का इलाज किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका। 5 अगस्त की सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर उसकी मौत हो गई। 

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यहां एक तथ्य महत्वपूर्ण है—बच्ची में एच1एन1 की पुष्टि हुई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर बड़ी बहन में इस संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी। परिवार के अनुसार, बड़ी बहन की मौत छोटी बहन से करीब तीन दिन पहले हुई थी। उसमें तेज बुखार और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण बताए गए थे।

हालांकि, उसकी एच1एन1 जांच से संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए दोनों मौतों को एच1एन1 संक्रमण से जोड़कर देखना उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही नहीं होगा।

दोनों बच्चियों की मौत का समय और परिवार में बीमारी के लक्षणों का सामने आना इस मामले को स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाता है, लेकिन बड़ी बहन के मामले में संक्रमण की पुष्टि नहीं होने की बात भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिल्ली में इस वर्ष अब तक 1,349 एच1एन1 मामले सामने आए हैं। सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और सरकारी अस्पतालों में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली में एच1एन1 के मामलों का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग रहा है। वर्ष 2021 में 92, 2022 में 442 और 2023 में 209 मामले दर्ज किए गए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 3,151 हो गई थी।

पिछले साल दिल्ली में फ्लू के करीब 4,000 मामले सामने आए थे। इनमें ज्यादातर मामले एच3एन2 के बताए गए थे। इस वर्ष एच1एन1 के मामले अधिक सामने आने की जानकारी दी गई है।

एच1एन1 के बढ़ते मामलों का असर अस्पतालों में भी दिखाई दे रहा है। सफदरजंग अस्पताल में जुलाई के दौरान एच1एन1 के 11 मरीज मिलने की जानकारी दी गई है। अगस्त में भी अस्पताल में मरीज पहुंचे हैं। निजी अस्पतालों में भी फ्लू के मरीज बढ़ने की जानकारी सामने आई है। पीएसआरआई के डॉ. जीसी खिलनानी के अनुसार, उनके अस्पताल में एच1एन1 के मामले करीब चार गुना बढ़े हैं।

कुछ मरीजों की हालत इतनी गंभीर हुई कि उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती करना पड़ा। इनमें फेफड़ों में गंभीर संक्रमण वाले मरीज भी शामिल हैं। एच1एन1 फ्लू का एक प्रकार है। इसके लक्षण आम फ्लू जैसे हो सकते हैं, इसलिए शुरुआती स्तर पर सिर्फ लक्षणों के आधार पर इसकी पहचान करना आसान नहीं होता।

आम लक्षणों में शामिल हैं:

कुछ मरीजों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है। हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। संक्रमण की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के जरिए की जाती है।

फ्लू के कुछ मामले गंभीर रूप ले सकते हैं। खासतौर पर जब संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करता है तो सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों में बहुत कम मामलों में फ्लू के बाद मस्तिष्क से जुड़ी जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा सुस्ती, बेहोशी, दौरे, सांस लेने में परेशानी या लगातार बिगड़ती हालत गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग ने छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं तथा मधुमेह, हृदय और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी फ्लू संक्रमण के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन समूहों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।

एच1एन1 सांस के जरिए फैलने वाला फ्लू संक्रमण है। संक्रमण से बचाव के लिए रोजमर्रा की कुछ सावधानियां अपनाने की सलाह दी जाती है। हाथ नियमित रूप से साबुन से धोएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें। फ्लू जैसे लक्षण होने पर मास्क पहनें और दूसरे लोगों से दूरी बनाए रखें। बीमार होने पर घर पर आराम करना और अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना भी महत्वपूर्ण है। फ्लू की दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। खुद से दवा लेने के बजाय लक्षण गंभीर होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

फ्लू संक्रमण के प्रसार को देखते हुए भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर उन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए जिन्हें संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है। घर में किसी व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण हों तो उसके साथ निकट संपर्क कम रखना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है।

दिल्ली में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एच1एन1 के मामले पिछले कुछ वर्षों में इस तरह रहे:

वर्ष एच1एन1 मामले
2021 92
2022 442
2023 209
2024 3,151
2026 1,349*

*दिए गए स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक। इन आंकड़ों से दिल्ली में एच1एन1 संक्रमण के मामलों में वर्ष-दर-वर्ष बदलाव दिखाई देता है। इस साल भी स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

दो सगी बहनों की मौत ने परिवार के लिए गंभीर स्थिति पैदा की है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों मौतों को एच1एन1 से जोड़ना उचित नहीं होगा। छोटी बहन में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसकी एमआरआई जांच में एएनईसी के संकेत मिले और इलाज के बावजूद उसकी मौत हो गई। बड़ी बहन में फ्लू जैसे लक्षण थे, लेकिन एच1एन1 संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए इस मामले को समझना जरूरी है।

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। सरकारी अस्पतालों में उपचार की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अस्पतालों में एच1एन1 और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। निजी अस्पतालों में भी मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को लक्षणों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।