IRCTC पर गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ क्यों नहीं? दिल्ली HC ने रेलवे से मांगा जवाब

17 Sep 2026

नई दिल्ली, 17 सितंबर। गर्भवती महिलाओं को ट्रेन में ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान लोअर बर्थ उपलब्ध कराने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रेलवे और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि मौजूदा रेलवे आरक्षण नीति में गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए प्राथमिकता देने का प्रावधान बताया गया है, लेकिन ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान इस सुविधा का लाभ लेने के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा याचिका में उठाया गया है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उम्मीद जताई कि रेलवे अधिकारी आईआरसीटीसी के मंच पर भी संबंधित आरक्षण नीति का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। अदालत ने रेलवे और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 30 सितंबर तक स्थगित कर दी।

याचिका का मुख्य मुद्दा गर्भवती महिलाओं के लिए ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग के दौरान लोअर बर्थ की सुविधा से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि रेलवे की आरक्षण नीति में गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। हालांकि, ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण संबंधित यात्री इस प्राथमिकता का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। याचिकाकर्ता अनुनय सहाय की ओर से दायर जनहित याचिका में गर्भवती महिलाओं के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रक्रिया में लोअर बर्थ की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी रखा गया कि आईआरसीटीसी रेलवे के एजेंट के रूप में काम करता है और रेलवे की आरक्षण नीति के ऑनलाइन मंच पर भी अनुपालन की व्यवस्था सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है।

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दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने मामले में रेलवे और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने उम्मीद जताई कि रेलवे और केंद्र सरकार इस मामले में उचित कदम उठाने के लिए आईआरसीटीसी को आवश्यक निर्देश जारी करेंगे। अदालत की ओर से यह टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई, जिसमें गर्भवती महिलाओं के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग में लोअर बर्थ की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट अपनी वेबसाइट पर मामलों से जुड़े आदेश और फैसलों की जानकारी प्रकाशित करता है।

याचिका में दावा किया गया है कि आईआरसीटीसी के मोबाइल ऐप के जरिए टिकट बुक करने वाली गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ की सुविधा प्राप्त करने में परेशानी होती है। याचिका के अनुसार, ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत चिकित्सक के प्रमाणपत्र के साथ व्यक्तिगत रूप से आरक्षण काउंटर पर जाना पड़ता है। याचिका में इस प्रक्रिया को ऑनलाइन टिकट बुकिंग की मौजूदा व्यवस्था से जुड़ी समस्या के रूप में उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान भी गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने रेलवे की मौजूदा आरक्षण नीति का उल्लेख किया। याचिका के अनुसार, इस नीति में गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ के लिए प्राथमिकता दिए जाने की व्यवस्था है। लोअर बर्थ की सुविधा विशेष रूप से ऐसे यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है जिन्हें ऊपरी या बीच वाली बर्थ पर चढ़ने में कठिनाई हो सकती है। याचिका में गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की शारीरिक जरूरतों और यात्रा की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोअर बर्थ की उपलब्धता का मुद्दा उठाया गया है। हालांकि, इस मामले में अदालत ने अभी अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। फिलहाल रेलवे और केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 30 सितंबर को होनी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने आईआरसीटीसी की भूमिका को भी ध्यान में रखा। आईआरसीटीसी रेलवे की ओर से ऑनलाइन टिकट आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने वाला मंच है। पीठ ने कहा कि आईआरसीटीसी रेलवे के एजेंट के तौर पर काम करता है। ऐसे में रेलवे की आरक्षण नीति का ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था में अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रेलवे की है। अदालत ने उम्मीद जताई कि रेलवे और केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाकर ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में भी संबंधित नीति के अनुपालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई करेंगे।

याचिका में ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट बुकिंग के बीच सुविधा के अंतर का भी मुद्दा उठाया गया है। याचिका के मुताबिक, ऑनलाइन बुकिंग में लोअर बर्थ की सुविधा नहीं मिलने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से आरक्षण काउंटर पर जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें पंजीकृत चिकित्सक का प्रमाणपत्र भी साथ ले जाना पड़ता है। याचिका में कहा गया है कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौर में यदि किसी विशेष श्रेणी के यात्री के लिए रेलवे की आरक्षण नीति के तहत सुविधा निर्धारित है, तो उस सुविधा को ऑनलाइन व्यवस्था में उपलब्ध कराने की मांग पर विचार किया जाना चाहिए।

याचिका में गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ की सुविधा का उद्देश्य उनकी शारीरिक जरूरतों और सुविधा से जोड़ा गया है। ट्रेन में मध्य और ऊपरी बर्थ तक पहुंचने के लिए चढ़ना पड़ता है, जबकि लोअर बर्थ तक पहुंच अपेक्षाकृत आसान होती है। इसी आधार पर याचिका में गर्भवती महिलाओं के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग में भी लोअर बर्थ सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस मामले में अदालत के सामने मुख्य प्रश्न यह है कि रेलवे की संबंधित आरक्षण नीति का लाभ ऑनलाइन टिकट बुकिंग के माध्यम से किस तरह उपलब्ध कराया जा सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेलवे और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई 30 सितंबर तक स्थगित कर दी है। अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों की ओर से अदालत के समक्ष जवाब दाखिल किया जाना है। फिलहाल अदालत ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।