जसोला के खुले नाले में गिरा 15 साल का मिथुन, 27 घंटे बाद भी नहीं मिला सुराग

23 Aug 2026

नई दिल्ली, 23 अगस्त। दिल्ली के जसोला गांव में खुले नाले में गिरने वाले 15 वर्षीय मिथुन की तलाश 26 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी जारी है। बच्चे का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। एनडीआरएफ के सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा रेस्क्यू अभियान को फिलहाल रोक दिया गया है और बड़ी मशीनें मंगाने के बाद तलाश को आगे बढ़ाया जाएगा।

मिथुन के नाले में गिरने की घटना उसके घर के पीछे हुई। परिजनों के मुताबिक, वह पेड़ से पतंग उतारने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसका हाथ फिसला और वह खुले नाले में जा गिरा। तेज बहाव के कारण वह पानी के साथ आगे बह गया। घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका।

मिथुन के भाई धर्मेंद्र ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बताया कि मिथुन घर के पीछे नाले के पास पेड़ से पतंग उतार रहा था। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह खुले नाले में गिर गया। धर्मेंद्र के मुताबिक, पड़ोसी से जानकारी मिलने के बाद वह तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आसपास की छतों और नाले के आगे के हिस्से में भी भाई की तलाश की, लेकिन मिथुन नहीं मिला। परिवार के अनुसार, नाले में पानी का बहाव तेज था। घर के पीछे से गुजर रहा यह नाला पूरी तरह खुला हुआ है। मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम को लेकर भी परिवार और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं।

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घटना के बाद मिथुन की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। परिवार को उम्मीद थी कि बचाव दल जल्द बच्चे का पता लगा लेगा, लेकिन कई घंटे की कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिली। एनडीआरएफ के सूत्रों के अनुसार, बचाव अभियान के तहत जितना शारीरिक रूप से संभव था, उतना प्रयास किया जा चुका है। इसके बावजूद मिथुन का पता नहीं चल सका। अब बड़ी मशीनें मंगाने की तैयारी की जा रही है, जिसके बाद नाले में तलाश का अभियान आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल रेस्क्यू अभियान को होल्ड पर रखा गया है। इसका अगला चरण बड़ी मशीनों की उपलब्धता के बाद शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

मिथुन के नहीं मिलने से उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के मुताबिक, वह लगातार अपने बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठी हैं। मां ने रोते हुए कहा, “मेरा बच्चा मुझे लाकर दे दो।” परिवार के लिए हर गुजरता घंटा चिंता बढ़ाने वाला है। परिजन लगातार बचाव अभियान के आगे बढ़ने और मिथुन के जल्द मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

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जब घटना के 24 घंटे से अधिक हो गए और मिथुन का कोई पता नहीं चला, तो परिवार और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने सड़क पर जाम लगाया और बच्चे की जल्द तलाश की मांग की। स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू अभियान को लेकर अपनी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बच्चे के लापता होने के बाद समय तेजी से बीत रहा है और उसे खोजने के लिए जल्द कार्रवाई की जानी चाहिए। घटना स्थल पर मिथुन के परिवार और आसपास के लोगों की मौजूदगी बनी रही। लोग लगातार बचाव दल की कार्रवाई और अगले चरण की तलाश की जानकारी लेते रहे।

मिथुन की मां ने आरोप लगाया कि मौके पर गोताखोर पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने नाले के पानी में उतरकर बच्चे की तलाश नहीं की। परिवार ने सवाल उठाया कि जब बच्चा नाले में बहा था, तो उसकी तलाश के लिए हर संभव प्रयास क्यों नहीं किया गया। हालांकि, गोताखोरों को लेकर परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इसी वजह से इस मामले में परिवार के आरोपों और बचाव अभियान से संबंधित आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एनडीआरएफ की ओर से तलाश अभियान चलाया गया था और अब बड़ी मशीनों की मदद से आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।

मिथुन के भाई धर्मेंद्र ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “हम गरीब हैं, इसलिए हमारी मदद नहीं हुई. अगर ये किसी अमीर का बच्चा होता तो उसे अब तक खोज लिया जाता.” धर्मेंद्र ने यह भी कहा कि 24 घंटे से ज्यादा बीतने के बावजूद परिवार से मिलने के लिए स्थानीय पार्षद, विधायक और सांसद नहीं पहुंचे। यह बयान मिथुन के परिवार की ओर से व्यक्त की गई नाराजगी को दर्शाता है। इन आरोपों या राजनीतिक प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

मिथुन की तलाश को लेकर एनडीआरएफ के सूत्रों ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि अब तक जितना शारीरिक रूप से संभव था, उतना प्रयास किया जा चुका है, लेकिन सफलता नहीं मिली। मिथुन के नाले में गिरने को करीब 26 घंटे हो चुके हैं। फिलहाल रेस्क्यू अभियान रोक दिया गया है। अब बड़ी मशीनें मंगाई जाएंगी और उनकी मदद से नाले में तलाश को आगे बढ़ाया जाएगा। रेस्क्यू अभियान का अगला चरण मशीनों के पहुंचने और संबंधित कार्रवाई शुरू होने के बाद आगे बढ़ने की बात कही गई है।

मौके की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिस नाले में मिथुन गिरा, वह उसके घर के ठीक पीछे से गुजरता है। नाला खुला हुआ है और उसमें गंदा पानी तेज बहाव के साथ बहता है। घटना स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्र के बीच खुले नाले के कारण ऐसी घटनाओं का जोखिम बना रहता है। हालांकि, इस घटना के संदर्भ में नाले की जिम्मेदारी, सुरक्षा उपायों की स्थिति या किसी विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर संबंधित सरकारी विभाग का विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

मिथुन के परिवार और स्थानीय लोगों की ओर से सबसे महत्वपूर्ण सवाल नाले के खुले होने और उसके आसपास सुरक्षा इंतजामों को लेकर उठाए गए हैं। घटना ने यह सवाल सामने रखा है कि रिहायशी इलाके में खुले नाले के आसपास बच्चों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए किस तरह के इंतजाम मौजूद थे। परिवार की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि हादसे के बाद बचाव अभियान किस तरह आगे बढ़ा और बच्चे की तलाश में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया गया। इन सवालों पर उपलब्ध सामग्री में संबंधित प्रशासनिक विभाग या स्थानीय निकाय की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

मिथुन के परिवार के लिए फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा बच्चे का पता लगना है। उसकी मां लगातार बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठी हैं, जबकि भाई और अन्य परिजन तलाश अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। एनडीआरएफ के अनुसार, अगला प्रयास बड़ी मशीनों की सहायता से किया जाएगा। इस बीच स्थानीय लोग भी बच्चे की जल्द तलाश की मांग कर रहे हैं। मिथुन के नाले में गिरने के बाद से 26 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसका अभी तक पता नहीं चला है। रेस्क्यू अभियान के अगले चरण में बड़ी मशीनों की मदद से तलाश आगे बढ़ाई जानी है।