दिल्ली में ‘लापता युवती’ केस ने पकड़ा तूल, एक्टिविस्टों से पूछताछ पर हाईकोर्ट में पुलिस का जवाब

27 Mar 2026

दिल्ली में लापता युवती से जुड़े मामले ने अब कानूनी और सियासी रूप ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि जिन 10 एक्टिविस्टों को लेकर आरोप लगाए गए थे, उन्हें न तो हिरासत में लिया गया और न ही किसी तरह का उत्पीड़न किया गया, बल्कि उन्हें सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

 

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में पुलिस ने बताया कि यह पूरा मामला जुलाई 2025 में दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसमें एक पिता ने अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने युवती को उसकी इच्छा के विरुद्ध एक गुप्त स्थान पर रखा है और उसका इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

 

पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कई नाम सामने आए, जिनमें कुछ एक्टिविस्ट और संगठन शामिल बताए गए। इसी आधार पर 12, 13 और 14 मार्च को संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस ने कहा कि सभी को नोटिस देकर बुलाया गया और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।

 

हलफनामे में यह भी कहा गया कि विजय नगर स्थित एक परिसर में गुप्त बैठकों और कथित रूप से माओवादी विचारधारा के प्रचार की जानकारी मिली थी। पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर कुछ लोगों से पूछताछ की और उन्हें जांच में शामिल होने के निर्देश दिए।

 

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया। इस पर कोर्ट ने पुलिस से जवाब तलब किया था।

 

सुनवाई के दौरान CCTV फुटेज को लेकर भी सवाल उठे। अदालत ने पाया कि संबंधित स्थानों के कैमरे काम नहीं कर रहे थे। इस पर कोर्ट ने PWD को फटकार लगाते हुए विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

 

मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी, जिसमें कोर्ट पुलिस और अन्य एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।