दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसा, 3 छात्रों की मौत; 8 घायल

06 Sep 2026

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से तीन छात्रों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। घायलों को मलबे से निकालकर एम्स और सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया है। हादसे के बाद एनडीआरएफ, दमकल, पुलिस, स्थानीय लोग और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र राहत एवं बचाव अभियान में जुटे रहे। मलबे में अभी कई छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई गई है।

यह घटना दिल्ली में पिछले तीन महीनों के दौरान इमारत ढहने की दूसरी बड़ी घटना के रूप में सामने आई है। इससे पहले 30 मई को सैदुलाजाब में पांच मंजिला इमारत गिरने से मेडिकल के छह छात्रों की मौत हुई थी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सत्य निकेतन में करीब 80 गज क्षेत्र में बनी पांच मंजिला इमारत में पीजी संचालित किया जा रहा था। इस भवन में दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों के छात्र रहते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसा रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे हुआ। इसके बाद इमारत का मलबा नीचे गिर गया और कई लोग उसके भीतर फंस गए।

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घटना की सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने के काम में जुटीं। स्थानीय लोगों और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी बचाव अभियान में मदद की। हादसे में तीन छात्रों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि आठ घायलों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

एम्स प्रशासन के अनुसार, हादसे के बाद चार घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें दो की हालत गंभीर बताई गई है। अन्य घायलों को भी उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। हादसे के बाद बचाव दलों का मुख्य प्रयास मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना रहा। मलबे में अभी और छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई गई है। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान मलबे को सावधानी से हटाया जा रहा है।

हादसे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान एक पिलर फटने के बाद इमारत के ढहने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, यह हादसे का अंतिम कारण नहीं माना गया है। अधिकारियों की जांच के बाद ही इमारत गिरने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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घटना के बाद भवन की संरचनात्मक स्थिति और उसमें किए गए निर्माण या रेनोवेशन से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इमारत काफी पुरानी थी और इसमें अपेक्षाकृत कम पिलर थे। भवन की हालत ठीक नहीं होने के कारण यह कई वर्षों तक खाली भी रही थी।

इमारत के भूतल पर दुकानें बनी थीं। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, भवन की खराब स्थिति के चलते ये दुकानें भी किराये पर नहीं लग पा रही थीं। पिछले वर्ष एक कंपनी ने इस इमारत को लीज पर लिया और इसके बाद यहां रेनोवेशन कराया गया। रेनोवेशन के बाद इमारत में पीजी शुरू किया गया और छात्रों के रहने की व्यवस्था की गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, शुरुआत में यहां रहने वाले छात्रों की संख्या कम थी, लेकिन इस वर्ष छात्रों की संख्या काफी बढ़ गई थी। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटा हुआ इलाका है। क्षेत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के कई प्रमुख कॉलेज स्थित हैं। इनमें श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, एआरएसडी कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज शामिल हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के इन कॉलेजों के आसपास होने के कारण सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में छात्रों के लिए पीजी की मांग बनी रहती है। यह क्षेत्र मूल रूप से रिहायशी इलाका है। हालांकि, समय के साथ कई मकानों को पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा है। हादसे वाली इमारत में भी छात्रों के लिए पीजी संचालित किया जा रहा था।

हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने मौके पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने वहां स्थित एक मंदिर की छत से सामने चल रहे बचाव अभियान को देखा। इस दौरान मंत्री कपिल मिश्रा, सांसद बांसुरी स्वराज और क्षेत्रीय विधायक अनिल शर्मा भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के जरिए हादसे के कारणों और इमारत की स्थिति से जुड़े पहलुओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सत्य निकेतन हादसे पर दुख जताया और बचाव अभियान में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। उन्होंने सभी बचाव दलों से हरसंभव प्रयास कर छात्रों तक पहुंचने और घायलों को तुरंत बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की अपील की।

राहुल गांधी के अनुसार, कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर मौजूद हैं और मदद के लिए तैयार हैं। उन्होंने कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पर्याप्त छात्रावास की व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों के पीजी में रहने का मुद्दा भी उठाया। राहुल गांधी ने कहा कि कई छात्र एक ही छत के नीचे बड़ी संख्या में रहने को मजबूर हैं और हर छात्र की जान कीमती है।

सत्य निकेतन हादसे से पहले 30 मई को दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना हुई थी। उस हादसे में मेडिकल के छह छात्रों की मौत हुई थी।

सत्य निकेतन की घटना करीब तीन महीने के भीतर इमारत ढहने की दूसरी बड़ी घटना के रूप में सामने आई है। दोनों घटनाओं में छात्रों की मौत हुई है। सत्य निकेतन हादसे के मामले में फिलहाल जांच के आदेश दिए गए हैं। इसलिए इमारत गिरने की वजह को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के परिणाम का इंतजार करना होगा।

हादसे के बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए विभिन्न एजेंसियां मौके पर काम करती रहीं। एनडीआरएफ, दमकल, पुलिस और स्थानीय लोगों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी बचाव अभियान में शामिल रहे।

आठ घायलों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा चुका है। एम्स प्रशासन के अनुसार वहां भर्ती चार घायलों में दो की हालत गंभीर है। मलबे में अभी अन्य छात्रों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दलों का अभियान जारी रहा। हादसे की पूरी स्थिति और इमारत गिरने के कारण की जानकारी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।