दिल्ली एसआईआर: 33% मतदाताओं के फॉर्म का डिजिटलीकरण बाकी, 24 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट सूची

18 Aug 2026

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत फॉर्म वितरण का चरण पूरा हो गया है। दिल्ली के सभी 13 जिलों में कुल 1,45,10,299 पंजीकृत मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाने का काम पूरा बताया गया है। हालांकि, फॉर्म के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 97,47,879 फॉर्म यानी 67.18 प्रतिशत फॉर्म ही अब तक डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो सके हैं।

इस हिसाब से 47.62 लाख से अधिक फॉर्म का डिजिटलीकरण अभी बाकी है। ड्राफ्ट मतदाता सूची 24 अगस्त को जारी होनी है। ऐसे में लंबित डिजिटल रिकॉर्ड की संख्या इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी यह बताती है कि फॉर्म का डिजिटलीकरण अभी अधूरा है; इससे संबंधित मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में अनिवार्य रूप से नहीं होंगे, ऐसा निष्कर्ष उपलब्ध आंकड़ों से स्वतः नहीं निकाला जा सकता।

दिल्ली में एसआईआर के तहत 30 जून से फॉर्म वितरण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। दिए गए आंकड़ों के अनुसार सोमवार को फॉर्म वितरण और डिजिटलीकरण का यह चरण समाप्त हुआ। सभी 13 जिलों में मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाने का काम 100 प्रतिशत पूरा किया गया। यानी फॉर्म वितरण के स्तर पर सभी जिलों में समान उपलब्धि दर्ज की गई। इसके बाद फॉर्म में उपलब्ध जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अब तक 97,47,879 फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। यह कुल मतदाताओं का 67.18 प्रतिशत है। वहीं 47.62 लाख फॉर्म अभी डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल नहीं किए जा सके हैं। 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के कारण आने वाले दिनों में डिजिटलीकरण की स्थिति पर ध्यान बना रहेगा।

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मौजूदा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में करीब 33 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं के फॉर्म का डिजिटलीकरण अभी बाकी है। यही आंकड़ा इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। फॉर्म का डिजिटलीकरण होने का मतलब है कि फॉर्म में दर्ज जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाना। इसलिए 47.62 लाख फॉर्म का लंबित होना यह बताता है कि इतनी संख्या में फॉर्म की डिजिटल प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ड्राफ्ट मतदाता सूची 24 अगस्त को जारी होने वाली है। ऐसे में फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ड्राफ्ट सूची जारी होने से पहले बड़ी संख्या में फॉर्म का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होना बाकी है।

जिलेवार आंकड़ों में डिजिटलीकरण की रफ्तार में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। बाहरी उत्तर जिला 75.68 प्रतिशत डिजिटलीकरण के साथ दिल्ली के जिलों में सबसे आगे है। इसके विपरीत दक्षिण-पूर्व जिले में केवल 56.32 प्रतिशत फॉर्म ही डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं। दक्षिण-पूर्व जिले में कुल 15,57,289 मतदाता हैं। इनमें से 8,77,064 फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। इस आधार पर करीब 6.80 लाख फॉर्म अभी डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल होना बाकी हैं। दक्षिण-पूर्व जिले में लंबित फॉर्म की यह संख्या दिल्ली के सभी जिलों में सबसे अधिक बताई गई है। इसके उलट बाहरी उत्तर जिले में 8,32,510 मतदाताओं के फॉर्म में से 6,30,030 फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। जिले का डिजिटलीकरण प्रतिशत 75.68 है, जो सभी जिलों में सर्वाधिक है।

केवल प्रतिशत के स्तर पर ही नहीं, बल्कि लंबित फॉर्म की कुल संख्या के लिहाज से भी जिलों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। दक्षिण-पूर्व जिले में करीब 6.80 लाख फॉर्म का डिजिटलीकरण बाकी है। पूर्वी जिले में यह संख्या करीब 5.71 लाख, उत्तर-पूर्व जिले में 5.44 लाख और दक्षिण जिले में करीब 5.20 लाख बताई गई है। इन चार जिलों को मिलाकर करीब 23.15 लाख फॉर्म अभी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होना बाकी हैं। इस आंकड़े से पता चलता है कि दिल्ली में लंबित डिजिटल फॉर्म का एक बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा जिलों में केंद्रित है। वहीं कुछ जिलों में डिजिटलीकरण की रफ्तार 70 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है।

दिल्ली में डिजिटलीकरण का औसत 67.18 प्रतिशत है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छह जिले इस औसत से पीछे हैं। दक्षिण-पूर्व जिले में 56.32 प्रतिशत, नई दिल्ली में 60.76 प्रतिशत, दक्षिण में 61.32 प्रतिशत, मध्य जिले में 61.96 प्रतिशत, उत्तर जिले में 64.15 प्रतिशत और पूर्वी जिले में 64.37 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हुए हैं। इनके मुकाबले कुछ जिलों में प्रगति 70 प्रतिशत से अधिक है। बाहरी उत्तर जिला 75.68 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है।

उत्तर-पूर्व जिला दिल्ली में सबसे ज्यादा मतदाताओं वाला जिला बताया गया है। यहां कुल 18,70,748 मतदाता हैं। इनमें से 13,27,118 फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। जिले का डिजिटलीकरण प्रतिशत 70.94 है। इस तरह उत्तर-पूर्व जिले में कुल मतदाताओं की संख्या अधिक होने के बावजूद डिजिटलीकरण की दर दिल्ली के औसत से ऊपर है।

24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने वाली है। इससे पहले दिल्ली की एसआईआर प्रक्रिया में फॉर्म के डिजिटल रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि फॉर्म वितरण पूरा हो चुका है, लेकिन डिजिटलीकरण अभी 67.18 प्रतिशत तक पहुंचा है। यानी वितरण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के बीच प्रगति का अंतर बना हुआ है। यही अंतर विभिन्न जिलों की स्थिति में भी दिखाई देता है। कुछ जिलों में तीन-चौथाई के करीब फॉर्म डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि दक्षिण-पूर्व जिले में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से भी कम है।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने चुनाव आयोग और भाजपा पर आरोप लगाए हैं। देवेंद्र यादव ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा करीब 33 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं होने की बात स्वीकार करना इस बात को दर्शाता है कि भाजपा अपने उद्देश्य में सफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ ने झुग्गी-झोपड़ियों, गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में फॉर्म वितरित नहीं किए। उनके अनुसार बड़ी संख्या में लोगों को “शिफ्ट” बताकर मतदाता सूची से हटाया गया है।  ये आरोप कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध सामग्री में चुनाव आयोग या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

देवेंद्र यादव ने 2002 से 2026 के बीच दिल्ली की जनसंख्या में हुई वृद्धि का हवाला देते हुए एसआईआर के लिए 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि दिल्ली की जनसंख्या 2002 में 1.44 करोड़ से बढ़कर 2026 में 2.26 करोड़ हो गई है। ऐसे में उनके अनुसार 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जिन करीब 33 प्रतिशत लोगों के फॉर्म जमा नहीं हुए हैं, उनका डेटा सार्वजनिक किया जाए।इसके अलावा उन्होंने मतदाता सूची में जोड़े गए, हटाए गए और स्थानांतरित किए गए नामों की जानकारी आधिकारिक सूची जारी होने से पहले राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट को उपलब्ध कराने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से अप्रैल 2026 तक पंजीकृत सभी मतदाताओं के नाम नई मतदाता सूची में स्वतः शामिल किए जाने की मांग भी रखी गई है।

दिल्ली में मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता भी सामने आई है। कांग्रेस ने फॉर्म वितरण, लंबित डिजिटल रिकॉर्ड और आधार सूची से जुड़े सवाल उठाए हैं। इस मामले में उपलब्ध सामग्री के अनुसार राजनीतिक आरोपों के अलावा जिलेवार डिजिटलीकरण के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों में फॉर्म वितरण की उपलब्धि 100 प्रतिशत बताई गई है, जबकि डिजिटलीकरण की कुल प्रगति 67.18 प्रतिशत है। इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि फॉर्म का घर-घर पहुंचना और उसके डेटा का डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होना प्रक्रिया के दो अलग-अलग चरण हैं।