दिल्ली में सोसायटी अध्यक्ष निकला वाहन चोर गिरोह का सरगना, पांच पर लगा मकोका

08 Aug 2026

दिल्ली और आसपास के राज्यों में लंबे समय से चल रहे वाहन चोरी के संगठित नेटवर्क के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक वाहन चोरी के इस सिंडिकेट के सरगना अमित नागर समेत पांच आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया गया है।

क्राइम ब्रांच का दावा है कि यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर से 200 से अधिक वाहन चोरी कर उन्हें पूर्वोत्तर भारत समेत देश के अलग-अलग राज्यों में बेच चुका है। पुलिस के अनुसार बुलंदशहर निवासी अमित नागर के खिलाफ अकेले वाहन चोरी के 50 से अधिक मामले दर्ज हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अमित नागर ने कथित तौर पर अपनी आपराधिक गतिविधियों को छिपाने और उत्तर प्रदेश पुलिस से बचने के लिए कई साल पहले दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-29 में अपना ठिकाना बनाया था। यहां वह क्रिएटिव हाइट्स आवासीय सोसायटी का अध्यक्ष भी बना हुआ था।

क्राइम ब्रांच ने अमित नागर के अलावा प्रमोद नागर, अशरफ सुल्तान, एटम नागर सिंह और पोत्संगबाम मुकेश सिंह के खिलाफ मकोका की कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक प्रमोद नागर बुलंदशहर के गांव अट्टा का रहने वाला है, जबकि अशरफ सुल्तान मेरठ के लोहिया नगर, खरखौदा का निवासी है। एटम नागर सिंह और पोत्संगबाम मुकेश सिंह मणिपुर के इंफाल क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस की जांच के अनुसार इन आरोपियों की भूमिका वाहन चोरी और चोरी किए गए वाहनों को अलग-अलग राज्यों में पहुंचाने वाले नेटवर्क में सामने आई है।

डीसीपी, क्राइम ब्रांच संजीव कुमार यादव के मुताबिक क्राइम ब्रांच ने इस मामले में प्रमोद नागर, अशरफ सुल्तान, एटम नागर सिंह और पोत्संगबाम मुकेश सिंह को अलग-अलग समय पर अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था।

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इनसे पूछताछ के दौरान अमित नागर के बारे में जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार अमित नागर करीब पांच साल से पुलिस की पकड़ से बच रहा था। इसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को गिरोह की गतिविधियों के संगठित तरीके से संचालित होने की जानकारी मिली।

पुलिस के मुताबिक जांच में गिरोह के संगठित अपराध में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद मकोका लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। बीते 10 जुलाई को एसीपी संजय कुमार नागपाल ने डीसीपी संजीव कुमार यादव के माध्यम से इस गिरोह के खिलाफ मकोका लगाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्यों के खिलाफ दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम में कई आपराधिक मामले दर्ज पाए गए। सरकारी लोक अभियोजक की कानूनी राय प्राप्त होने के बाद क्राइम ब्रांच ने अमित नागर और उसके चार साथियों के खिलाफ मकोका लगाया। पुलिस अधिकारी के अनुसार इस कथित संगठित अपराध का मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ हासिल करना था। इसके लिए गिरोह वाहन चोरी का नेटवर्क संचालित करता था।

पुलिस की जांच के मुताबिक चोरी किए गए वाहनों को गिरोह के अलग-अलग सदस्यों के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाता था। इस तरह चोरी किए गए वाहनों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर ले जाकर बेचने की व्यवस्था की जाती थी।

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जांच में यह भी पता चलने का दावा किया गया है कि अमित नागर केवल अपने पुराने साथियों पर निर्भर नहीं था। पुलिस के अनुसार उसने दिल्ली, मणिपुर, मेरठ, मुरादाबाद और संभल से नए लोगों को गिरोह में शामिल किया।

क्राइम ब्रांच के अनुसार अमित नागर के संपर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय कई छोटे आपराधिक गिरोहों से थे। पुलिस का कहना है कि वाहन चोरी का नेटवर्क कई समूहों में बंटा हुआ था। इन समूहों के सदस्य वाहन चोरी और चोरी किए गए वाहनों को ठिकाने लगाने से जुड़े अलग-अलग काम करते थे। जांच एजेंसी के मुताबिक गिरोह के सदस्य वाहन चोरी के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस के अनुसार चोरी किए गए वाहनों की बिक्री से प्राप्त धन और उससे बनाई गई संपत्तियों का इस्तेमाल सिंडिकेट को मजबूत करने में किया जाता था।

पुलिस के दावे के अनुसार वाहन चोरी का यह नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। गिरोह के सदस्यों के तार दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पूर्वोत्तर के राज्यों तक जुड़े मिले। पुलिस का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर से चोरी किए गए वाहनों को अलग-अलग माध्यमों से दूसरे राज्यों में पहुंचाया जाता था। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी चोरी किए गए वाहनों की आपूर्ति किए जाने की बात जांच में सामने आई है। इस मामले में मणिपुर के इंफाल क्षेत्र से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई है।

पुलिस के अनुसार गिरोह के कथित सरगना अमित नागर के खिलाफ वाहन चोरी के 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह बुलंदशहर का रहने वाला बताया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक पिछले कई वर्षों से उसके खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर आपराधिक मामले दर्ज होते रहे हैं। इसके बावजूद वह दिल्ली के रोहिणी इलाके में रह रहा था। पुलिस का दावा है कि उसने अपनी पहचान और सामाजिक स्थिति का इस्तेमाल सामान्य जीवन जीने के लिए किया और क्रिएटिव हाइट्स आवासीय सोसायटी का अध्यक्ष भी बना हुआ था।

क्राइम ब्रांच के अनुसार अमित नागर और उसके साथियों के खिलाफ पिछले करीब दस वर्षों के दौरान दिल्ली तथा अन्य राज्यों की अदालतों में एक से अधिक आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जांच में सामने आए पुराने मामलों और वर्तमान मामले में मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस ने इसे संगठित अपराध से जुड़ा मामला माना और मकोका लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी मकोका का इस्तेमाल संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किया जाता है। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान गिरोह की कथित गतिविधियों, उसके सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामलों और अलग-अलग राज्यों तक फैले नेटवर्क को आधार बनाकर मकोका की कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच के अनुसार सरकारी लोक अभियोजक की कानूनी राय लेने के बाद पांच आरोपियों के खिलाफ मकोका लगाया गया।