दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से प्रभावित स्थानों की एक सूची सामने आई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 7 अगस्त तक राजधानी में कुल 72 स्थानों पर जलभराव दर्ज किया गया। इनमें 21 स्थान ऐसे हैं, जिन्हें लगातार दूसरे साल भी जलभराव वाले संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, इन दोहराए जाने वाले स्थानों में दक्षिण और मध्य दिल्ली के हिस्सों की संख्या सबसे अधिक है। पुल प्रह्लादपुर अंडरपास, जखीरा अंडरपास और मिंटो ब्रिज अंडरपास सहित कई स्थान इस सूची में शामिल हैं। दूसरी ओर, इस साल जलभराव वाले कुल स्थानों की संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में कम दर्ज हुई है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की सूची के अनुसार, इस साल के मानसून की शुरुआत 2 जुलाई से हुई थी और 7 अगस्त तक राजधानी में 72 ऐसे स्थान दर्ज किए गए जहां सड़कों या मार्गों पर जलभराव हुआ।
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उपलब्ध आंकड़ों की तुलना करें तो 2025 में 169 स्थानों और 2024 में 194 स्थानों पर जलभराव दर्ज किया गया था। इस आधार पर इस साल दर्ज स्थानों की संख्या 2025 की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत और 2024 की तुलना में करीब 63 प्रतिशत कम रही।
हालांकि, पिछले सप्ताह हुई तेज बारिश के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में दोबारा जलभराव की स्थिति देखने को मिली। पानी भरने से कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
ट्रैफिक पुलिस ने 72 जलभराव वाले स्थानों में से 21 को ऐसे क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है जहां इस साल और पिछले साल दोनों मानसून में जलभराव दर्ज हुआ। इन 21 स्थानों में दक्षिण दिल्ली और मध्य दिल्ली के पांच-पांच स्थान शामिल हैं। पूर्वी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में तीन-तीन स्थानों को दोहराए जाने वाले जलभराव वाले क्षेत्र के रूप में दर्ज किया गया। पश्चिमी दिल्ली में ऐसे दो स्थान पाए गए।
प्रमुख स्थानों में पुल प्रह्लादपुर अंडरपास, जखीरा अंडरपास, मिंटो ब्रिज अंडरपास, पटपड़गंज का उत्सव पार्क और पुराना किला रोड-सी हेक्सागन मार्ग शामिल हैं। पश्चिमी दिल्ली में बलबीर सिंह संधू मार्ग स्थित पंजाबी बाग फ्लाईओवर के नीचे और रिंग रोड के मायापुरी चौक पर भी दोबारा जलभराव दर्ज किया गया।
पूरे 72 स्थानों की सूची में दक्षिण दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा। यहां 24 सड़कें और मार्ग जलभराव से प्रभावित बताए गए हैं। इसके बाद उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 16 स्थान दर्ज किए गए। उत्तरी दिल्ली और मध्य दिल्ली में 13-13 स्थानों पर जलभराव दर्ज किया गया। वहीं पश्चिमी और पूर्वी दिल्ली में तीन-तीन स्थान इस सूची में शामिल रहे।
दक्षिण दिल्ली में मेहरौली-बदरपुर रोड सबसे अधिक प्रभावित मार्गों में रहा। इस मार्ग पर कम से कम 12 स्थानों पर जलभराव की सूचना दर्ज की गई। इनमें पुल प्रह्लादपुर अंडरपास, जामिया हमदर्द टी-प्वाइंट, खानपुर टी-प्वाइंट से हमदर्द टी-प्वाइंट के बीच दोनों कैरिजवे, देवली मोड़ टी-प्वाइंट, वायुसेना स्टेशन, वायुसेनाबाद से बत्रा अस्पताल तक का मार्ग और पीपल चौक शामिल हैं।
दक्षिण दिल्ली के अन्य जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में ओखला अंडरपास, राव तुला राम मार्ग स्थित संजय टी-प्वाइंट, महिपालपुर के पास एनएसजी ट्रैफिक सिग्नल, फूल मंडी और छतरपुर के पास गदाईपुर चौक शामिल हैं।
इसके अलावा निजामुद्दीन खट्टा, प्रेस एन्क्लेव रोड पर मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन के बाहर और आउटर रिंग रोड पर सावित्री फ्लाईओवर के पास भी जलभराव दर्ज किया गया। इन स्थानों में कई प्रमुख मार्ग और संपर्क सड़कें शामिल हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है।
नई दिल्ली तथा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद क्षेत्र में भी कई संवेदनशील स्थान दर्ज किए गए हैं। इनमें मिंटो ब्रिज अंडरपास, जंतर-मंतर के पास जनपथ-टॉल्सटॉय मार्ग, गोल डाकखाना और तीन मूर्ति मार्ग के बीच मदर टेरेसा क्रिसेंट मार्ग, शांति पथ-सत्यमार्ग गोलचक्कर और पंचशील मार्ग पर ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग के बाहर का क्षेत्र शामिल है।
इसके अलावा जनपथ-मौलाना आजाद रोड गोलचक्कर, सुनहरी मस्जिद के बाहर, पुराना किला रोड-सी हेक्सागन तथा भैरों मार्ग-मथुरा रोड भी प्रभावित स्थानों की सूची में शामिल हैं।
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने कहा है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर सुधारात्मक और एहतियाती कदम पहले ही उठाए गए हैं। एनडीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जनपथ-टॉल्सटॉय मार्ग जंक्शन पर जल निकासी व्यवस्था में आई समस्या को ठीक किया गया है। यह व्यवस्था दिल्ली मेट्रो रेल निगम के निर्माण कार्य के दौरान प्रभावित हुई थी।
अधिकारी के अनुसार, तिब्बती मार्केट के पास दो अतिरिक्त जल निकासी पंप लगाए गए हैं। इसके अलावा बेल माउथ और गली ट्रैप की तीन बार गाद सफाई की गई है। अधिकारी ने कहा, “इसके परिणामस्वरूप हाल की बारिश के दौरान जनपथ-टॉल्सटॉय मार्ग जंक्शन या तिब्बती मार्केट के पास जलभराव नहीं देखा गया।”
एनडीएमसी ने अफ्रीका एवेन्यू और सत्यमार्ग क्षेत्र में भी जल निकासी पंपों के प्रभावी संचालन की जानकारी दी। अफ्रीका एवेन्यू पंप हाउस और सत्य सदन पंप हाउस पर लगाए गए पंपों के बारे में अधिकारी ने कहा कि हाल की बारिश में यहां जलभराव दर्ज या देखा नहीं गया।
एनडीएमसी के अनुसार पंचशील रोड की जल निकासी व्यवस्था की पूरी तरह गाद सफाई और सफाई कराई गई है। एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद हाल की बारिश के दौरान वहां जलभराव नहीं देखा गया। अधिकारी ने कहा, “एनडीएमसी मानसून के दौरान चिन्हित सभी संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रख रही है और सक्रिय कदम उठा रही है।”
उत्तर, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी दिल्ली में भी कई स्थान इस मानसून के दौरान जलभराव से प्रभावित रहे। इनमें जखीरा अंडरपास, आजाद मार्केट अंडरपास और हनुमान मंदिर से कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे के बीच का मार्ग शामिल है।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-24 और गाजीपुर चिकन मार्केट के पास दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, लिबासपुर अंडरपास तथा प्रेमबाड़ी अंडरपास भी जलभराव वाले स्थानों में दर्ज किए गए। इन इलाकों में जलभराव होने पर प्रमुख सड़कों पर वाहनों की गति प्रभावित होने की स्थिति बनी।
अपर पुलिस आयुक्त, यातायात विजयंत आर्या गोयल के अनुसार, जलभराव से संबंधित आंकड़े सड़कों पर तैनात कर्मियों से मिलने वाली वास्तविक समय की जानकारी के आधार पर तैयार किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि मैदानी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मी जलभराव वाले स्थानों की जानकारी तस्वीरों और वीडियो के साथ नियंत्रण कक्ष को भेजते हैं। इसके बाद संबंधित नागरिक एजेंसियों को कार्रवाई के लिए सूचना दी जाती है।
उन्होंने कहा, “हमारी फील्ड व्यवस्था से जलभराव वाले स्थानों की वास्तविक समय की जानकारी तस्वीरों और वीडियो के साथ नियंत्रण कक्ष को साझा की जाती है। इसके अनुसार संबंधित जानकारी एमसीडी, पीडब्ल्यूडी और एनडीएमसी जैसी नागरिक एजेंसियों तक आवश्यक कार्रवाई के लिए पहुंचाई जाती है।” इस व्यवस्था का उद्देश्य जलभराव वाले स्थानों की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाना और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में जलभराव की समस्या के पीछे एक से अधिक कारण हो सकते हैं। इनमें पुरानी और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था, नालियों में गाद और कचरा जमा होना, जल निकासी तथा सड़क की खराब बनावट और रखरखाव की कमी शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया कि कई सड़कें ऐसे निचले इलाकों में हैं जहां प्राकृतिक रूप से पानी जमा होता है। अधिकारी के मुताबिक, ऐसे स्थानों की स्थायी इंजीनियरिंग व्यवस्था में बदलाव और नियमित रखरखाव के जरिए जलभराव की समस्या का समाधान किया जा सकता है।