अम्बेडकरनगर, 29 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले से जुड़ी न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय का नाम अब देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल हो गया है। 28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में उनके नाम की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई।
यह सिफारिश ऐसे समय हुई है जब न्यायमूर्ति उपाध्याय दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं। उनके साथ गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह के नाम की भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई है। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की निर्धारित प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए फिलहाल इसे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफारिश के रूप में देखा जा रहा है, अंतिम नियुक्ति के रूप में नहीं।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय का जन्म 16 जून 1965 को उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले के मुस्कुराई गांव में हुआ था। उनके न्यायिक जीवन की शुरुआत वकालत से हुई और करीब दो दशक बाद वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। उनकी शैक्षिक और पेशेवर यात्रा लखनऊ से शुरू हुई। उन्होंने लखनऊ के काल्विन तालुकदार कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई की। उपलब्ध जीवनी संबंधी जानकारी के अनुसार उन्होंने वर्ष 1991 में विधि की डिग्री हासिल की और 11 मई 1991 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। इस तरह उनके न्यायिक करियर की शुरुआती कड़ी उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से जुड़ी रही।
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वकालत के शुरुआती दौर में न्यायमूर्ति उपाध्याय ने अपने पिता आर.ए. उपाध्याय के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ खान और एस.के. कालिया के साथ भी कानूनी क्षेत्र में काम किया। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उनकी प्रैक्टिस मुख्य रूप से दीवानी और संवैधानिक मामलों से जुड़ी रही। वर्ष 2007 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया था। उन्होंने न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने तक इस जिम्मेदारी को संभाला। यह अनुभव उनके न्यायिक करियर से पहले की महत्वपूर्ण पेशेवर पृष्ठभूमि का हिस्सा रहा।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 6 अगस्त 2013 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबे समय तक न्यायाधीश के रूप में काम करने के बाद 28 मार्च 2023 को वह लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश बने। इसके कुछ ही महीनों बाद उनके न्यायिक करियर में एक और महत्वपूर्ण बदलाव आया।
29 जुलाई 2023 को न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला। वह इस पद पर जनवरी 2025 तक रहे। इसके बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। भारत सरकार के न्याय विभाग की 1 अप्रैल 2026 की सूची में भी न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में दर्ज किया गया है। इस रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 21 जनवरी 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला।
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति उपाध्याय ने जनवरी 2025 में कार्यभार संभाला। उनके वर्तमान पद और पूर्व न्यायिक जिम्मेदारियों का उल्लेख भारत सरकार के न्याय विभाग के रिकॉर्ड में भी मिलता है। अब 28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम को देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉलेजियम जानकारी के मुताबिक 28 सितंबर की बैठक में तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई। इनमें न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह शामिल हैं।
कॉलेजियम द्वारा नाम की सिफारिश न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। 28 सितंबर को जारी जानकारी के अनुसार इन सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय के मामले में फिलहाल कॉलेजियम की ओर से सिफारिश हो चुकी है। अंतिम नियुक्ति और शपथ के बाद ही वह औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इस अंतर को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कॉलेजियम की सिफारिश और न्यायाधीश की अंतिम नियुक्ति एक ही चरण नहीं हैं। 28 सितंबर की कॉलेजियम बैठक में तीन नामों की सिफारिश की गई।
- न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल — गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय — दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह — तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
इन तीनों नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की है।
रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में इस समय 34 कार्यरत न्यायाधीश हैं और तीनों सिफारिशों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 37 हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीशों की है। न्यायमूर्ति उपाध्याय के अब तक के न्यायिक सफर को प्रमुख पड़ावों में इस तरह समझा जा सकता है:
1965: अम्बेडकरनगर में जन्म।
1991: विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद 11 मई को अधिवक्ता के रूप में नामांकन।
2007: उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता नियुक्त।
2011: इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त।
2013: इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने।
मार्च 2023: लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश बने।
जुलाई 2023: बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
जनवरी 2025: दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला।
28 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए नाम की सिफारिश की।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नामों पर विचार करता है और सिफारिश करता है। 28 सितंबर 2026 की बैठक में कॉलेजियम ने तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के नाम सुप्रीम कोर्ट के लिए अनुशंसित किए। न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय के मामले में यह प्रक्रिया उनके लंबे न्यायिक करियर के बाद सामने आई है। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनका जन्म अम्बेडकरनगर में हुआ और उनके पेशेवर जीवन का शुरुआती बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा रहा। अब कॉलेजियम की सिफारिश के बाद उनकी आगे की नियुक्ति प्रक्रिया केंद्र सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।