देश की पहली बार डिजिटल गिरफ्तारी के अपराधी को 7 साल की कैद और हजारों का जुर्माना

19 Jul 2025


>देश में पहली बार ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए साइबर ठगी करने वाले आरोपी को न्यायालय ने सात साल की कठोर कारावास और 68,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला साइबर अपराधों के विरुद्ध एक ऐतिहासिक मिसाल बन गया है, जिससे ऐसे अपराधियों के मन में भय पैदा होगा और डिजिटल सुरक्षा को लेकर आम जनता में भी चेतना बढ़ेगी।


>सजा पाने वाला आरोपी देवाशीष राय, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मसौना गांव का निवासी है, जिसे लखनऊ की डॉक्टर सौम्या गुप्ता से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 85 लाख रुपये की ठगी करने का दोषी पाया गया। इस हाई-प्रोफाइल साइबर अपराध में यह पहली बार हुआ जब किसी साइबर ठग को इतनी सख्त सजा दी गई हो, और वह भी सिर्फ 14 महीनों में मुकदमा दर्ज होने से लेकर सजा मिलने तक।


>क्या है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का मामला?


>साल मई 2024 में लखनऊ की केजीएमयू की डॉक्टर सौम्या गुप्ता को एक कॉल आता है। फोन करने वाला खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताता है और कहता है कि डॉक्टर के नाम पर एक कार्गो पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें नकली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएम (नशीला पदार्थ) मिला है। इसके बाद आरोपी ने महिला डॉक्टर को मानसिक दबाव में लेकर उन्हें कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में डाल दिया — यानि कि लगातार डराकर, वीडियो कॉल पर नजर रखते हुए, 10 दिनों तक उनसे 85 लाख रुपये ठग लिए।


>तेजी से की गई कार्रवाई बनी उदाहरण


>जैसे ही यह मामला साइबर क्राइम सेल के पास पहुंचा, तत्काल एफआईआर दर्ज कर इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने एक विशेष टीम के साथ जांच शुरू की। मात्र पांच दिन के भीतर देवाशीष राय को गोमतीनगर विस्तार के मंदाकिनी अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।


>पुलिस ने सिर्फ तीन महीनों में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने हर सुनवाई में सशक्त पैरवी की और आरोपी की हर जमानत याचिका को अदालत से खारिज करवा दिया। यह पूरे केस को तेज़ गति से निपटाने का एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया।


>डिजिटल ठगों के खिलाफ कड़ा संदेश


>इस मामले ने साफ कर दिया है कि अब डिजिटल अपराध कर भाग पाना आसान नहीं होगा। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने इसे साइबर क्राइम के इतिहास में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय मिलने से आम जनता में भरोसा बढ़ेगा और अपराधियों में कानून का खौफ भी पैदा होगा।