>लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक बार फिर गंभीर आरोपों से घिरा एक बड़ा मामला सामने आया है। फार्माकोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अमोद कुमार सचान पर निजी प्रैक्टिस, निजी संस्थाओं से लाभ लेने और फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। डॉ. सचान जून महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले ही उन पर जांच समिति द्वारा तैयार की गई 150 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट कार्यपरिषद की बैठक में प्रस्तुत की गई। केजीएमयू की कार्यपरिषद ने शुक्रवार को कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए डॉ. सचान को आरोप पत्र जारी किया और एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इसके बाद 11 या 12 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में उनके खिलाफ अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
>रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. सचान सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस करते रहे और एक प्राइवेट संस्था में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के तौर पर कार्य कर आर्थिक लाभ उठाते रहे। इसके अलावा, उन पर निजी कंपनियों से प्रत्यक्ष रूप से लाभ लेने के भी प्रमाण मिले हैं। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वे एक निजी मेडिकल कॉलेज चलाने में भी शामिल थे, जबकि वह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब KGMU प्रशासन कार्रवाई के लिए पूरी तरह तत्पर है।
>डॉ. सचान की पूर्व पत्नी डॉ. ऋचा मिश्रा, जो शेखर हॉस्पिटल की डायरेक्टर हैं, ने 2 मई को गाजीपुर थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉ. सचान नकली दवाओं का कारोबार करते हैं और जब वह इसका विरोध करती हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। ऋचा मिश्रा ने आरोप लगाया कि 13 मार्च को उनके साथ मारपीट भी की गई थी। इस मामले में डॉ. सचान के अलावा राकेश वर्मा, वरुण श्रीवास्तव, राजेश राय और दो अन्य के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है।
>इतना ही नहीं, साल 2014 में डॉ. सचान और डॉ. ऋचा मिश्रा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया गया था। जांच में यह सामने आया कि उनके पांच बैंक खातों में चार वर्षों के भीतर लगभग 10 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई। एक खाते में 78 लाख 90 हजार, दूसरे में 3 करोड़ 57 लाख, तीसरे में 1 करोड़ 77 लाख, चौथे में 3 करोड़ 33 लाख और पांचवें में 53 लाख रुपये की जमाराशि दर्ज हुई थी। बसपा शासनकाल के दौरान इन खातों में असामान्य रूप से बड़ी रकम जमा होने पर लोकायुक्त से शिकायत की गई थी, जिसके बाद केस दर्ज हुआ था।
>डॉ. सचान ने इस पूरे प्रकरण को साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई बदले की भावना से प्रेरित है और यह सारा षड्यंत्र उनकी पूर्व पत्नी और केजीएमयू के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच में शिकायतकर्ता खुद उपस्थित नहीं हुए और बिना किसी ठोस प्रमाण के उनकी छवि को धूमिल किया जा रहा है।
>गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब KGMU की कार्यपरिषद ने किसी वरिष्ठ डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई की हो। इससे पहले भी जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. केके सिंह, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. केपी सिंह और IT विभाग से जुड़े डॉ. आशीष वाखलू जैसे चिकित्सकों पर गंभीर आरोपों के चलते बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।
>डॉ. एके सचान के मामले में अब निगाहें 11 या 12 जुलाई को होने वाली अगली कार्यपरिषद की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें उनके भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने KGMU में पारदर्शिता और आंतरिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।