>जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों के लिए राहत भरी खबर है। अब केवल शहर ही नहीं, बल्कि गांवों की गलियों में भी गंगाजल बहेगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अधिसूचित ग्रामीण क्षेत्रों को भी शुद्ध गंगाजल से जोड़ने की दिशा में तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। यह योजना ना सिर्फ जल आपूर्ति को सुचारु बनाएगी बल्कि गिरते भूजल स्तर को भी संतुलित करेगी।
>प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने जानकारी दी कि योजना के पहले चरण में 122 गांवों को गंगाजल आपूर्ति से जोड़ा जाएगा। इनमें से 80 गांवों में पहले से भूजल आधारित सप्लाई हो रही है, जबकि 38 गांवों में पेयजल पाइपलाइन का काम प्रगति पर है। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
>85 क्यूसेक क्षमता की गंगाजल परियोजना पर काम युद्धस्तर पर जारी है। प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार के अनुसार, यह परियोजना 2025 के अंत तक अपनी पूरी क्षमता के साथ लागू हो जाएगी। इसके बाद ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट दोनों क्षेत्रों को गंगाजल की स्थायी आपूर्ति मिल सकेगी।
>वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में 206 नलकूपों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 180 एमएलडी भूजल की आपूर्ति की जा रही है, जबकि 60-70 एमएलडी गंगाजल अलग से वितरित हो रहा है। लेकिन 2031 तक का लक्ष्य है 210 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
>इस योजना के लागू होने से ग्रामीणों को अब टैंकरों या हैंडपंपों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें भी शहरों की तरह पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ गंगाजल मिलेगा। यह बदलाव न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी होगा, बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।