गाजियाबाद में तेजी से बढ़ते अवैध फ्लैट निर्माण को लेकर शहरी नियोजन और सुरक्षा से जुड़े सवाल सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शहर और आसपास के क्षेत्रों में 20 हजार से अधिक अवैध फ्लैट बने हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे निर्माण बताए जा रहे हैं, जहां स्वीकृत नक्शा, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और पर्याप्त पार्किंग जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
इन फ्लैटों का निर्माण शहर के विभिन्न हिस्सों में किया गया है। कई जगह चार से छह मंजिला इमारतें संकरी गलियों में खड़ी कर दी गई हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण आपात स्थिति में दमकल वाहनों की पहुंच भी चुनौती बन सकती है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन अवैध निर्माणों में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाने के साथ बैंक ऋण लेकर ऐसे फ्लैट खरीदे हैं। ऐसे में अवैध निर्माण पर कार्रवाई और खरीदारों के हितों के बीच संतुलन प्रशासन के सामने एक अहम चुनौती बन गया है।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि पर शहर के विकसित इलाकों का नाम देकर कई जगह चार से छह मंजिला इमारतें बनाई गईं। इन फ्लैटों को आकर्षक विज्ञापनों के जरिए मध्यमवर्गीय परिवारों तक पहुंचाया गया। कई मामलों में टू बीएचके फ्लैट की कीमत 12 से 24 लाख रुपये के बीच बताई गई। खरीदारों को बैंक से 90 प्रतिशत तक ऋण दिलाने का वादा किए जाने की बात भी सामने आई है। कम कीमत और ऋण की सुविधा के दावों के कारण ऐसे आवास मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आकर्षक बने। हालांकि, अवैध निर्माण में संपत्ति खरीदने से संबंधित दस्तावेजों और स्वीकृत मानचित्र की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
शहर को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने के लिए मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्रों के लिए सड़क, पार्क, सीवर, जल निकासी और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की योजना बनाई जाती है।लेकिन अवैध निर्माण में इन मानकों का पालन नहीं होने से नियोजित विकास प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई स्थानों पर संकरी गलियों में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया गया है। इस तरह के निर्माण से केवल संबंधित इमारत तक समस्या सीमित नहीं रहती। आबादी बढ़ने के साथ सड़क, सीवर, पानी, बिजली और कूड़ा निस्तारण जैसी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ता है।
अवैध फ्लैटों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार कई इमारतों में अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। चार से छह मंजिल तक बनी कुछ इमारतें ऐसे रास्तों पर स्थित हैं, जहां आपात स्थिति में दमकल वाहनों के पहुंचने में परेशानी हो सकती है। आग लगने या भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षित निकासी और राहत कार्य के लिए पर्याप्त व्यवस्था जरूरी होती है। ऐसे में बिना आवश्यक सुरक्षा इंतजाम के बने निर्माणों को लेकर चिंता बढ़ती है।
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कई अवैध फ्लैटों में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले परिवारों के वाहनों के लिए पर्याप्त जगह न होने पर आसपास की सड़कों और गलियों पर दबाव बढ़ता है। पहले से संकरी सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से स्थानीय आवागमन प्रभावित हो सकता है। यही सड़कें आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल वाहनों के लिए भी इस्तेमाल होती हैं।
अवैध रूप से विकसित क्षेत्रों में केवल भवन निर्माण ही समस्या नहीं है। कई जगह सड़क, सीवर लाइन और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की जानकारी दी गई है। बारिश के दौरान जल निकासी की क्षमता कम होने पर जलभराव की स्थिति बनती है। आबादी बढ़ने के साथ पेयजल, बिजली और कूड़ा निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसका प्रभाव केवल अवैध निर्माण वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आई है। आसपास की वैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को भी बढ़ती आबादी और बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
इन फ्लैटों की बिक्री में इंटरनेट मीडिया पर किए जाने वाले विज्ञापनों की भी भूमिका बताई गई है। सस्ते आवास और आसान ऋण जैसे दावों के जरिए मध्यमवर्गीय परिवारों को आकर्षित किया गया। कम कीमत में अपना घर मिलने की उम्मीद में कई खरीदारों ने फ्लैट बुक किए। कुछ मामलों में खरीदारों ने अपनी बचत के साथ ऋण लेकर संपत्ति खरीदी। ऐसी स्थिति में यदि निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो तो खरीदारों के सामने संपत्ति के भविष्य को लेकर कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।
गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों में आग, भवनों में दरार और संरचनात्मक खामियों से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। आकाश नगर, लोनी, मसूरी के मिसलगढ़ी और खोड़ा जैसे इलाकों में जर्जर या अवैध निर्माणों के गिरने के मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। इन घटनाओं ने अवैध निर्माण में भवन की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाई है।
जीडीए की वेबसाइट पर 30 से अधिक पुरानी अवैध कॉलोनियों की सूची होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, लंबे समय से आबादी बस जाने वाले क्षेत्रों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। नई अवैध कॉलोनियों के विकसित होने की सूचना मिलने पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। इस स्थिति में एक तरफ अवैध निर्माण को रोकना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ पहले से रह रहे परिवारों के हित भी जुड़े हैं। यही कारण है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान खरीदारों और निवासियों की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
जीडीए से मिली जानकारी के अनुसार प्राधिकरण के आठ जोन में हर महीने करीब 25 से 30 ध्वस्तीकरण और सीलिंग कार्रवाई की जाती हैं। इसके अलावा 100 से अधिक नोटिस भी जारी किए जाते हैं। जीडीए के अनुसार अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। शिकायत या सूचना मिलने पर संबंधित स्थान पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है।
जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल के अनुसार अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी शिकायत या सूचना मिलती है, वहां सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी फ्लैट को खरीदने से पहले उसका स्वीकृत मानचित्र और वैधानिक दस्तावेज जरूर जांच लें। यह सलाह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कम कीमत वाले फ्लैटों के विज्ञापन खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं और कई परिवार आवास खरीदने के लिए अपनी बचत के साथ बैंक ऋण का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
गाजियाबाद के नियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्रों के साथ सड़क, पार्क, सीवर, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं का प्रावधान किया जाता है।लेकिन अवैध रूप से विकसित होने वाले क्षेत्रों में इन सुविधाओं का विकास उसी अनुपात में नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप आबादी बढ़ने के साथ मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ता है। 20 हजार से अधिक अवैध फ्लैटों का आंकड़ा ऐसे निर्माणों के बड़े पैमाने को दर्शाता है। वहीं, इनमें रहने वाले परिवारों की संख्या को देखते हुए प्रशासन के सामने अवैध निर्माण रोकने के साथ मौजूदा निवासियों और खरीदारों से जुड़े मामलों को संभालने की भी चुनौती बनी हुई है।