नोएडा में इंजीनियर की मौत के बाद गाजियाबाद अलर्ट, खुले नाले हर कदम पर बन रहे जानलेवा खतरा

12 Jul 2026

नोएडा के सेक्टर-58 में खुले नाले में गिरने के बाद करंट लगने से एक इंजीनियर की मौत ने आसपास के शहरों में भी सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच गाजियाबाद के कई इलाकों में नालों पर रखे स्लैब हटे होने या टूटे होने की स्थिति सामने आई है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।

शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर नालों के ऊपर बने पैदल मार्ग अधूरे या क्षतिग्रस्त हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन स्थानों की मरम्मत नहीं हुई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-58 में एक इंजीनियर नाले के ऊपर बने स्लैब से गुजर रहे थे। इसी दौरान स्लैब हटे होने के कारण वह लगभग तीन फीट नीचे खुले नाले में गिर गए, जहां करंट की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।

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इस घटना के बाद गाजियाबाद के विभिन्न इलाकों में भी खुले नालों की स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर पैदल चलने वालों के लिए बने रास्तों से स्लैब गायब हैं, जबकि कुछ जगहों पर स्लैब टूट चुके हैं।

शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र आरडीसी में नालों के ऊपर बने पैदल मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं। कुछ स्लैब टूटे हुए हैं तो कुछ पूरी तरह हटे हुए दिखाई देते हैं। यह इलाका दिनभर व्यस्त रहता है और शाम के समय यहां पैदल चलने वालों की संख्या काफी अधिक रहती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय पर्याप्त रोशनी न होने के कारण खुले नाले आसानी से दिखाई नहीं देते। ऐसे में थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

आरडीसी के अलावा विजय नगर, बहरामपुर, चौधरी मोड़, लोहा मंडी, नवयुग मार्केट और चौपला बाजार के आसपास भी कई स्थानों पर नालों के स्लैब हटे होने की जानकारी सामने आई है।

चौधरी मोड़ के पास जीटी रोड किनारे बना नाला भी कई जगह खुला पड़ा है। यह मार्ग शहर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क किनारे खुले नाले दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

कुछ स्थानों पर स्थानीय निवासियों ने संभावित हादसों से बचाव के लिए खुले नालों के आसपास लकड़ी और अन्य अस्थायी सामग्री लगाकर बैरिकेडिंग की है। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं होने के कारण उन्हें स्वयं एहतियाती कदम उठाने पड़ रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार नगर निगम की ओर से नियमित सफाई के दौरान नालों के ऊपर रखे स्लैब हटाए जाते हैं ताकि सिल्ट निकाली जा सके। सफाई पूरी होने के बाद कई बार सिल्ट कई दिनों तक सड़क किनारे पड़ी रहती है और कुछ स्थानों पर स्लैब दोबारा अपनी जगह नहीं रखे जाते। इसी कारण खुले नाले लंबे समय तक लोगों के लिए जोखिम बने रहते हैं।

नोएडा में हुए हादसे के बाद गाजियाबाद के खुले नालों की स्थिति ने सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। शहर के कई व्यस्त इलाकों में खुले या क्षतिग्रस्त नाले राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी खतरा बने हुए हैं। स्थानीय लोग संबंधित विभाग से इन स्थानों पर जल्द मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं।