सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन से खाली हुई खोसी सीट क्या बनेगी विधानसभा चुनाव से पहले उपचुनाव का कारण ?

20 Nov 2025


>उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्माती नजर आ रही है। मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद रिक्त हो गई है। नियमों के मुताबिक, किसी भी विधायी सीट के खाली होने पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही इस सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


>20 नवंबर को सपा विधायक सुधाकर सिंह के आकस्मिक निधन ने न सिर्फ पार्टी को बड़ा झटका दिया, बल्कि घोसी के राजनीतिक समीकरण को भी बदल दिया है। 2023 के उपचुनाव में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को लगभग 50,000 वोटों से हराकर यह सीट समाजवादी पार्टी की झोली में डाली थी। उनकी यह जीत प्रदेश की राजनीति में खूब सुर्खियों में रही थी।


>सुधाकर सिंह के निधन से अब घोसी सीट खाली हो चुकी है, जिसके चलते उपचुनाव तय माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच एक बार फिर इस महत्वपूर्ण सीट पर सीधी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिल सकती है। 2022 में इस सीट से दारा सिंह चौहान सपा के टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में पाला बदलकर BJP में शामिल हो गए थे। इस्तीफे के बाद 2023 में उपचुनाव हुए और सपा ने बाज़ी मारी। अब एक बार फिर जनता किसे चुनती है, यह देखना दिलचस्प होगा।


>सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मेदांता अस्पताल जाकर स्वर्गीय विधायक के परिवार से मुलाकात की और शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा सुधाकर सिंह जी के निधन की खबर अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।


>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा मऊ के घोसी विधान सभा क्षेत्र से माननीय विधायक श्री सुधाकर सिंह जी का निधन अत्यंत दुखद है। प्रभु श्रीराम दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।


>घोसी विधानसभा सीट पूर्वांचल की राजनीति में अहम मानी जाती है। यहां के चुनावी नतीजे अक्सर आसपास की सीटों पर भी असर डालते हैं। लगातार राजनीतिक दलों के बदलते समीकरण और बार-बार उपचुनाव इसे और अधिक सुर्खियों में रखते हैं।


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