राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में बैंक अधिकारी मानस बाजपेयी द्वारा अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा और बहन शीबा बाजपेयी की गोली मारकर हत्या करने तथा इसके बाद खुदकुशी करने के मामले में शुक्रवार को दोनों परिवारों के अलग-अलग पक्ष सामने आए। तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया और इसके बाद परिजन शव लेकर रवाना हो गए।

पुलिस की जांच फिलहाल घटना के पूरे क्रम, दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद, तलाक की कानूनी प्रक्रिया, आर्थिक दावों और घटना से पहले दोनों के बीच हुई बातचीत की कड़ियों पर केंद्रित है। पुलिस बैंक और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के साथ मोबाइल फोन तथा कॉल विवरण समेत अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
दिव्या के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी मानस के व्यवहार से परेशान थी। वहीं मानस के मामा अवधेश शुक्ला ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों शिक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर थे तथा उनके बीच मुख्य समस्या अहं के टकराव की थी।
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पुलिस के मुताबिक गुरुवार दोपहर मानस बाजपेयी अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा के कार्यालय पहुंचे। दिव्या एक निजी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। पुलिस के अनुसार मानस ने फोन कर उन्हें बाहर बुलाया।
बताया गया है कि दोनों के बीच बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया। आरोप है कि मानस ने दिव्या के साथ मारपीट की और उनके चेहरे पर गोली मार दी। बैंक परिसर के बाहर गोली चलने के बाद वहां अफरातफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल दिव्या को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मानस वहां से निकल गया और अपने घर पहुंचा।
पुलिस के अनुसार पत्नी की हत्या के बाद मानस अपने घर गया। बताया गया है कि घर का दरवाजा बंद करने के बाद उसने टीवी पर तेज आवाज में हनुमान चालीसा चलाई। इसके बाद उसने अपनी बहन शीबा बाजपेयी को गोली मार दी। बहन की हत्या के बाद मानस ने अपनी कनपटी में गोली मारकर खुदकुशी कर ली।
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एक ही दिन में पति-पत्नी और भाई-बहन की तीन मौतों की घटना से गोमतीनगर क्षेत्र में पुलिस जांच तेज हो गई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बैंक के बाहर विवाद के बाद घर पहुंचने तक मानस किन लोगों के संपर्क में था और घर के भीतर शीबा की हत्या से पहले क्या हुआ।
परिजनों के मुताबिक मानस और दिव्या की शादी करीब नौ साल पहले हुई थी। परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार शादी के दो-तीन साल बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ।
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समय के साथ मतभेद बढ़ते गए और दोनों अलग रहने लगे। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में नौकरी करते थे। दिव्या बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं, जबकि मानस भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी करते थे। परिवार के अनुसार दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर थे। इसके बावजूद वैवाहिक विवाद लगातार बढ़ता गया और बाद में मामला पारिवारिक न्यायालय तक पहुंच गया।
परिजनों के अनुसार मानस और दिव्या के बीच तलाक को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। हाल में इस मामले की सुनवाई भी हुई थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अदालत की कार्यवाही और घटना के बीच क्या घटनाक्रम हुआ। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि घटना से ठीक पहले दोनों के बीच क्या बातचीत हुई और क्या किसी तत्काल विवाद के बाद स्थिति हिंसक हुई। परिजनों का कहना है कि दोनों को समझाने और वैवाहिक संबंध बचाने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन दोनों के बीच तनाव समाप्त नहीं हो सका।
घटना के बाद सामने आए विवरण में तलाक की कार्यवाही के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपये के गुजारा भत्ता की मांग किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है और इसका घटना से सीधा संबंध भी पुलिस जांच का विषय है।
पुलिस तलाक से संबंधित दस्तावेजों और अदालत में दोनों पक्षों की ओर से रखी गई बातों की भी जांच कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि आर्थिक दावों और वैवाहिक विवाद का घटनाक्रम पर क्या असर था।
पोस्टमार्टम हाउस में दिव्या के पिता सतीश चंद्र मिश्रा ने मानस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी मानस के व्यवहार से काफी परेशान थी। उनके अनुसार दोनों परिवारों ने कई बार समझौता कराने और रिश्ता बचाने की कोशिश की थी, लेकिन विवाद समाप्त नहीं हुआ। सतीश चंद्र मिश्रा ने यह भी कहा कि पारिवारिक न्यायालय में सुनवाई के दौरान मानस के व्यवहार को लेकर जज के सामने भी आपत्ति जताई गई थी। ये आरोप दिव्या के परिवार की ओर से हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
वहीं पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मानस के मामा अवधेश शुक्ला ने दिव्या के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों से अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “अगर मेरा भांजा साइको होता तो क्या एसबीआई में होता? वह हाईली एजुकेटेड था। बस दोनों का ईगो टकराता था।”
अवधेश शुक्ला ने कहा कि मानस और दिव्या दोनों शिक्षित थे और आर्थिक रूप से सक्षम थे। उनके मुताबिक विवाद के पीछे मुख्य वजह आपसी मतभेद और अहं का टकराव था। उन्होंने मानस के बैंक में चयन का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने अपने पिता के सामने परीक्षा पास कर सरकारी बैंक में नौकरी हासिल की थी।
मानस के मामा ने कहा कि दोनों के पास आर्थिक संसाधन थे और विवाद को केवल पैसों की कमी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि दोनों अपने-अपने क्षेत्र में काम करते थे और आर्थिक रूप से सक्षम थे।
उन्होंने यह भी कहा कि जब विवाद परिवार के भीतर तक सीमित था, तब परिवार के स्तर पर इसे सुलझाने की कोशिश होती रही, लेकिन मामला अदालत तक पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई।
अवधेश शुक्ला ने कहा कि उनका परिवार किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। उन्होंने कहा, “मानस हमारा भांजा था तो दिव्या भी हमारे परिवार की बहू थी।”
उन्होंने मानस के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर असहमति जताई और कहा कि घटना के पीछे की वास्तविक वजह लंबे समय से चले आ रहे विवाद और दोनों के बीच बढ़ते मतभेदों में तलाशनी चाहिए। यह बयान मानस के परिवार का पक्ष है। पुलिस की जांच पूरी होने से पहले इसे घटना का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों परिवारों ने वैवाहिक संबंध बचाने के लिए कई बार हस्तक्षेप किया। इसके बावजूद दंपती के बीच विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में दोनों अलग रहने लगे।
तलाक की कार्यवाही शुरू होने के बाद विवाद कानूनी मंच तक पहुंच गया। पुलिस अब अदालत से जुड़े दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयानों को घटना के संदर्भ में देख रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लंबे समय से चल रहा विवाद गुरुवार को अचानक हिंसा में कैसे बदला।
पुलिस घटना की पूरी तस्वीर तैयार करने के लिए बैंक और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही मानस और दिव्या के मोबाइल फोन, कॉल विवरण और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह जानना चाहती है कि मानस बैंक पहुंचने से पहले कहां था, उसने किन लोगों से बातचीत की और पत्नी की हत्या के बाद घर जाते समय उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। घर के भीतर बहन शीबा की हत्या से पहले की परिस्थितियां भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पुलिस दोनों घटनास्थलों से मिले साक्ष्यों को आपस में जोड़ने की कोशिश कर रही है।
शुक्रवार को तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम हाउस में दोनों परिवारों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं। दिव्या के परिवार ने लंबे समय से चल रहे वैवाहिक तनाव और मानसिक परेशानी का आरोप लगाया, जबकि मानस के मामा ने विवाद की वजह को आपसी अहं और मतभेदों से जोड़ते हुए किसी मानसिक बीमारी के आरोप को खारिज किया।
इस तरह घटना के संभावित कारण को लेकर दोनों परिवारों के बयान अलग हैं। पुलिस की जांच में इन दावों के साथ-साथ उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और अन्य साक्ष्यों की भूमिका अहम रहेगी।