गोंडा हत्याकांड: चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने रामनगर में रोका, समर्थकों संग धरने पर बैठे

13 Sep 2026

गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शनिवार को पीड़ित परिवार से मिलने गोंडा जा रहे भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले को बाराबंकी के रामनगर स्थित बुढ़वल चौराहे पर पुलिस ने रोक लिया। इस दौरान पुलिस और सांसद के समर्थकों के बीच खींचतान की स्थिति बनी।

घटना के दौरान कुछ युवाओं द्वारा चंद्रशेखर आजाद के काफिले की ओर जूते-चप्पल फेंके जाने की बात सामने आई। इन युवाओं के हाथों में ‘रोहिणी घावरी को इंसाफ दो’ लिखे पोस्टर थे। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद वाहन से उतर गए और अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। सांसद ने पुलिस पर उनके साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों से माफी की मांग की। करीब एक घंटे तक चले हंगामे और धरने के बाद चंद्रशेखर आजाद को अपने काफिले के साथ वापस लौटना पड़ा।

चंद्रशेखर आजाद शनिवार को विनोद साहनी हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने गोंडा जा रहे थे। इसी दौरान गोंडा और बाराबंकी की संयुक्त पुलिस ने रामनगर के बुढ़वल चौराहे पर उनका काफिला रोक दिया। पुलिस द्वारा काफिला रोके जाने के बाद मौके पर मौजूद समर्थकों और पुलिस के बीच खींचतान की स्थिति बनी। इसी दौरान कुछ युवाओं ने काफिले की ओर जूते-चप्पल फेंके। स्रोत के अनुसार, इन युवाओं के हाथों में ‘रोहिणी घावरी को इंसाफ दो’ लिखे पोस्टर थे। घटना के बाद चंद्रशेखर आजाद वाहन से नीचे उतरे और अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर आपत्ति जताई और समर्थकों से अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों से माफी की मांग की।

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बुढ़वल चौराहे पर चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों के धरने के कारण करीब एक घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। सांसद इस बात पर अड़े रहे कि उनके समर्थकों के साथ अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों को माफी मांगनी चाहिए। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद को अपने काफिले के साथ वापस लौटना पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पीड़ित परिवार से मिलने के लिए गोंडा की ओर जा रहे थे, लेकिन पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद वह परिवार से मुलाकात के लिए आगे नहीं जा सके।

घटना के बाद चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस के व्यवहार को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए पीड़ित परिवार के बीच जा रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस अधिकारियों का आचरण मर्यादित होना चाहिए। उनके अनुसार, एक चुने हुए सांसद के साथ इस तरह का अमर्यादित व्यवहार उचित नहीं है। सांसद ने पुलिस पर धक्का-मुक्की और गाली-गलौज का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों के साथ अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों से माफी की मांग की।

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चंद्रशेखर आजाद ने विनोद साहनी की हत्या की घटना को लेकर भाजपा सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पोषित गुंडे इस तरह के अपराध कर रहे हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भीम आर्मी से डरी हुई है। चंद्रशेखर आजाद के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी के कार्यक्रमों के लिए समय से अनुमति नहीं दी जाती। ये आरोप चंद्रशेखर आजाद की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर सरकार या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई अलग प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

चंद्रशेखर आजाद के काफिले को रोके जाने के दौरान मौके पर पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोंडा के एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता, सीओ गोंडा परसपुर उदित नारायण पालीवाल, सीओ गरिमा पंत और तहसीलदार विपुल सिंह मौके पर मौजूद थे। इसके अलावा कोतवाल अरुण प्रताप सिंह समेत रामनगर, मसौली, बदोसराय सहित कई थानों की पुलिस फोर्स भी मौके पर तैनात रही। पुलिस बल की मौजूदगी के बीच ही चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों ने धरना दिया। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद उनका काफिला वापस लौट गया।

विनोद साहनी हत्याकांड के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। शनिवार को चंद्रशेखर आजाद का पीड़ित परिवार से मिलने गोंडा जाना इसी घटनाक्रम का हिस्सा रहा। हालांकि, गोंडा पहुंचने से पहले ही रामनगर के बुढ़वल चौराहे पर पुलिस ने उनका काफिला रोक दिया। इसके बाद मौके पर धरना और हंगामे की स्थिति बनी। घटना के दौरान एक तरफ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे, वहीं दूसरी ओर चंद्रशेखर आजाद के साथ उनके समर्थक भी मौजूद थे। काफिले पर जूते-चप्पल फेंके जाने की घटना के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हुई, जिसके बाद सांसद वाहन से उतरकर धरने पर बैठ गए।

चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में कहा कि उनका उद्देश्य किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवार से मिलने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रहे थे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के आचरण को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस का व्यवहार मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ अभद्रता के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों से माफी की मांग की। उपलब्ध सूचना में पुलिस की ओर से चंद्रशेखर आजाद के इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।