कौन हैं उत्कलमणि गोपबंधु दास? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली में उनकी कांस्य प्रतिमा का किया अनावरण

03 Aug 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दक्षिणी दिल्ली के लाजपत नगर स्थित लाजपत भवन में सोमवार को ओडिशा के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, शिक्षाविद और पत्रकार उत्कलमणि गोपबंधु दास की 75 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर लोक सेवक मंडल के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

लोक सेवक मंडल के अनुसार, संसद भवन को छोड़कर दिल्ली में यह पहला स्थान है, जहां उत्कलमणि गोपबंधु दास की प्रतिमा स्थापित की गई है। संस्था का कहना है कि इस प्रतिमा का उद्देश्य उनके विचारों और लोकसेवा के आदर्शों से नई पीढ़ी को परिचित कराना है।

लाजपत भवन परिसर में स्थापित यह कांस्य प्रतिमा लगभग 75 किलोग्राम वजनी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसका औपचारिक अनावरण किया। लोक सेवक मंडल के अनुसार, यह स्थापना केवल एक स्मारक नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवता के मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास है।

उत्कलमणि गोपबंधु दास ओडिशा के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं। उन्हें समाज सुधार, शिक्षा के प्रसार, पत्रकारिता और जनसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए व्यापक सम्मान मिला।

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उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में लोकसेवा और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। सामाजिक सुधार और शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने की दिशा में उनके कार्यों को आज भी याद किया जाता है।

गोपबंधु दास ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान और राष्ट्र निर्माण के विचारों के समर्थक रहे। उनके जीवन और कार्यों के कारण उन्हें ओडिशा में विशेष सम्मान प्राप्त है और उन्हें "उत्कलमणि" की उपाधि से भी जाना जाता है।

लोक सेवक मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चोपड़ा के अनुसार, राष्ट्रसेवा, शिक्षा, सामाजिक समर्पण और लोक-कल्याण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के माध्यम से नई पीढ़ी को गोपबंधु दास के जीवन, विचारों और सार्वजनिक सेवा की भावना से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।

लोक सेवक मंडल के अनुसार, संसद भवन के अतिरिक्त दिल्ली में कहीं और उत्कलमणि गोपबंधु दास की प्रतिमा स्थापित नहीं है। ऐसे में लाजपत भवन में इस प्रतिमा की स्थापना उनके योगदान को व्यापक स्तर पर सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।