उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। नगर निगम द्वारा लागू इस प्रणाली से मानसून के दौरान जलभराव में 65 प्रतिशत से अधिक सुधार हुआ है, जबकि पंप बंद होने की घटनाएं 60 प्रतिशत तक कम हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम के लागू होने के बाद जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। नगर निगम के अनुसार, इस तकनीकी प्रणाली की मदद से मानसून के दौरान जलभराव की घटनाओं में 65 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। इसके साथ ही पंपिंग सिस्टम के ऑटोमेशन के कारण पंप बंद होने की घटनाएं भी करीब 60 प्रतिशत तक घट गई हैं, जिससे शहरवासियों को बड़ी राहत मिली है।
गोरखपुर नगर निगम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तकनीक आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण को लागू करते हुए AI और आईओटी , डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन तकनीक और फ्लड मॉडलिंग को एकीकृत कर यह प्रणाली विकसित की है। इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य वर्षा और जलभराव की स्थिति का पहले से आकलन करना और समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसके तहत सेंसर आधारित निगरानी, रियल टाइम डेटा विश्लेषण और स्वचालित पंपिंग सिस्टम को एक साथ जोड़ा गया है।
इस परियोजना के तहत गोरखपुर में देश का पहला AI आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल स्थापित किया गया है, जिसका उद्घाटन 23 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। इस सेल को प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग से भी सराहना मिली है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, UFMC के जरिए 24 घंटे पहले वर्षा और संभावित जलभराव का पूर्वानुमान 80 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ किया जा रहा है। ट्रायल चरण में 250 से अधिक शिकायतों में से 70 प्रतिशत का समाधान कुछ ही घंटों के भीतर कर दिया गया, जबकि पूरी प्रणाली की दक्षता में 65 प्रतिशत से अधिक सुधार दर्ज किया गया।
इस अर्बन फ्लड मैनेजमेंट मॉडल को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया तक सीमित न रहकर पूर्व तैयारी और दीर्घकालिक योजना में भी सहायक बने। इसके तहत शहर के सभी प्रमुख नालों, उपकरणों, अधिकारियों और संबंधित टीमों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैप किया गया है। गोरखपुर में 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है, जहां विशेष निगरानी रखी जाती है। इसके अलावा सभी पंपिंग स्टेशनों को पूरी तरह से ऑटोमेटेड कर दिया गया है, जिससे मैनुअल हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो गई है।
शहर में 24 घंटे सक्रिय रहने वाला एक इमरजेंसी कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जो लगातार स्थिति की निगरानी करता है और फील्ड टीमों के साथ समन्वय बनाए रखता है। नागरिकों के लिए एक ग्रीवांस पोर्टल भी विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से वे अपनी समस्याएं दर्ज कर सकते हैं और उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है।
तकनीकी दृष्टि से इस प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम ने शहर में दो ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए हैं, जो हर 15 मिनट पर वर्षा से संबंधित डेटा उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही प्राथमिक और द्वितीयक नालों पर 110 ऑटोमैटिक वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं, जो हर 2 से 15 मिनट के अंतराल पर जलस्तर की जानकारी भेजते हैं। जब किसी नाले में जलस्तर 80 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को स्वतः अलर्ट प्राप्त होता है। वहीं, पंपिंग स्टेशनों के संप वेल में जलस्तर 60 प्रतिशत से अधिक होने पर पंप अपने आप चालू हो जाते हैं।
UFMC प्रणाली पूर्वानुमान, तैयारी और सुरक्षा के तीन चरणों में कार्य करती है। वर्षा से एक दिन पहले ही संभावित जलभराव क्षेत्रों की पहचान कर संबंधित अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी जाती है। इसके आधार पर मोबाइल पंप, सक्शन मशीन और फील्ड टीमों की तैनाती पहले से सुनिश्चित कर ली जाती है। साथ ही यह भी जांचा जाता है कि सभी पंप सही स्थिति में कार्य कर रहे हैं और नालों में कहीं अवरोध तो नहीं है।
वर्षा शुरू होते ही कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय हो जाता है और लगातार अपडेट जारी करता है कि किन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन रही है, किन स्थानों पर तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है और कहां अतिरिक्त संसाधन भेजे जाने चाहिए। इससे फील्ड टीमों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलते हैं और वे तेजी से कार्रवाई कर पाती हैं।
इस प्रणाली के लागू होने के बाद जलभराव से संबंधित शिकायतों के समाधान का समय भी काफी कम हो गया है। पहले जहां शिकायतों के समाधान में 10 से 12 घंटे का समय लगता था, अब यह घटकर 1 से 2 घंटे के भीतर रह गया है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां हर साल जलभराव की समस्या बनी रहती थी, इस बार स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
पंपिंग स्टेशनों के ऑटोमेशन और समय पर रखरखाव के कारण पंप बंद होने की घटनाओं में भी बड़ी कमी आई है। रीयल टाइम अलर्ट और पूर्व चेतावनी प्रणाली के चलते कई संवेदनशील इलाकों में इस बार जलभराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। तकनीक के उपयोग से न केवल कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी बेहतर हुआ है, जिससे आपदा प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और त्वरित बन सकी है।