लखनऊ, 6 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी विकास परियोजनाओं के लिए नगर निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने की मंजूरी दे दी गई। इसके तहत गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़ रुपये और मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी कर सकेंगे।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से दोनों नगर निगमों को विकास परियोजनाओं के लिए केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय पूंजी बाजार से भी वित्त जुटाने का अवसर मिलेगा। साथ ही नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और संसाधन जुटाने की व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
म्युनिसिपल बॉण्ड वह वित्तीय माध्यम है जिसके जरिए नगर निकाय निवेशकों से धन जुटाते हैं। इस राशि का उपयोग सड़क, पेयजल, सीवर, ड्रेनेज, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य शहरी अवसंरचना परियोजनाओं के विकास में किया जाता है। बॉण्ड के माध्यम से जुटाई गई राशि को निर्धारित अवधि के बाद निवेशकों को ब्याज सहित वापस किया जाता है।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से नगर निगमों को दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।
कैबिनेट ने अवस्थापना विकास निधि (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से दोनों नगर निगमों की क्रेडिट रेटिंग को मजबूत करने के लिए भी सहायता उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बेहतर क्रेडिट रेटिंग मिलने से नगर निकायों की बाजार में वित्त जुटाने की क्षमता बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के तहत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसे राज्य स्तर के प्रमुख सुधारों में भी शामिल किया गया है।
इसी क्रम में गोरखपुर नगर निगम ने 80 करोड़ रुपये और मुरादाबाद नगर निगम ने 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने का प्रस्ताव तैयार किया है। दोनों नगर निगम अपने-अपने सदनों से इन प्रस्तावों को मंजूरी भी दिला चुके हैं और संबंधित परियोजनाओं का चयन कर लिया गया है। वित्त मंत्री के अनुसार, म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले नगर निकायों को भारत सरकार की प्रोत्साहन योजना के तहत भी अनुदान मिलेगा।
इसके तहत 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपये तक और 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। हालांकि, इसके लिए नगर निगमों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा निर्धारित सभी नियामकीय प्रावधानों का पालन करना होगा।
प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाना है ताकि वे शहरी विकास परियोजनाओं के लिए विभिन्न स्रोतों से संसाधन जुटा सकें। इसके लिए नगर निगमों में वित्तीय प्रबंधन, बाजार आधारित वित्त जुटाने की क्षमता और क्रेडिट योग्यता को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इससे नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और शहरी आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्त उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।