मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्किट बिज़नेस पर उसके असर को देखते हुए केंद्र में मोदी सरकार 2 लाख करोड़ रुपये की विशेष क्रेडिट गारंटी स्कीम लाने की तैयारी में है। ये योजना भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर निर्यात-आधारित क्षेत्रों और एमएसएमई पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में कारगर साबित हो सकती है।
ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच सरकार एक पहले से तैयार सहायता पैकेज को लागू करने पर विचार कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंसियल सर्विसेज द्वारा तैयार की गई यह स्कीम अगले 15 दिनों के भीतर शुरू की जा सकती है।
यह नई क्रेडिट गारंटी स्कीम कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के मॉडल पर आधारित होगी। उस समय इस योजना के जरिए व्यवसायों को आर्थिक संकट से उबरने में सहायता दी गई थी।
बिना गिरवी मिलेगा लोन: वित्त मंत्रालय के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना के तहत व्यवसायों को सरकारी गारंटी के साथ बिना किसी गिरवी के लोन उपलब्ध कराया जा सकता है। खासतौर पर MSMEs को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि उन्हें फंड की उपलब्धता में आसानी हो और नकदी संकट से बचा जा सके।
किन्हें होगा फायदा: वैश्विक व्यापार में रुकावटों के चलते निर्यात-आधारित सेक्टरों में शुरुआती दबाव के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में एमएसएमई जो ब्याज दरों में बदलाव के प्रति संवेदनशील होते हैं और स्थिर नकदी प्रवाह पर निर्भर रहते हैं इस योजना के प्रमुख लाभार्थी हो सकते हैं।
सरकार की रणनीति: इस 2 लाख करोड़ रुपये की योजना के तहत बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसका ढांचा काफी हद तक कोविड काल में अपनाए गए मॉडल जैसा होगा, जिसका उद्देश्य व्यवसायों को समर्थन देना और बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते एनपीए को नियंत्रित करना था।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में वित्तीय प्रणाली में कोई तत्काल दबाव नहीं है, लेकिन सरकार एहतियात के तौर पर एक सुरक्षा कवच तैयार कर रही है। यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो यह योजना अर्थव्यवस्था को आवश्यक लिक्विडिटी सपोर्ट प्रदान कर सकेगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भले ही जिओपोलिटिकल तनाव कम हो जाए, प्रभावित क्षेत्रों में सुधार तत्काल नहीं होगा। सप्लाई चेन में रुकावट और मांग को लेकर अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है, जिसका असर भारतीय उद्योगों पर भी पड़ सकता है।