साइबर ठगी का दायरा अब देश की सीमाओं से आगे बढ़ चुका है। ग्रेटर नोएडा की बिसरख कोतवाली पुलिस ने ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो गूगल पर फर्जी विज्ञापनों के जरिए विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी 100 से अधिक विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बना चुके हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से की गई। सभी आरोपी ग्रेटर नोएडा के बिसरख क्षेत्र स्थित चेरी काउंटी सोसायटी में किराए के फ्लैट से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
डीसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान असम के तिनसुकिया निवासी आकिब अमीन, दिल्ली निवासी चर्चित शर्मा, असम के कामरूप निवासी कृष्णा देव वर्मन और एंजल देव वर्मन, दिमा हसाओ निवासी रंजना सुनार तथा डिगबोई निवासी रेखा के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य लक्ष्य विदेशी नागरिक थे। विशेष रूप से अमेरिका में रहने वाले ऐसे लोग, जिन्हें अपने कंप्यूटर या मोबाइल में तकनीकी समस्या आने पर ऑनलाइन सहायता की आवश्यकता होती थी।
जांच में सामने आया कि आरोपी गूगल पर वायरस हटाने, तकनीकी खराबियां दूर करने और साइबर सुरक्षा सेवाओं के नाम पर फर्जी विज्ञापन चलाते थे। जब कोई विदेशी नागरिक तकनीकी सहायता के लिए गूगल पर संबंधित सेवाएं खोजता था, तो उसे इन आरोपियों के फर्जी संपर्क नंबर दिखाई देते थे।
फोन करने पर आरोपी खुद को सोशल सिक्योरिटी विभाग का अधिकारी, तकनीकी सहायता विशेषज्ञ या साइबर सुरक्षा सलाहकार बताकर बातचीत शुरू करते थे। भरोसा जीतने के बाद वे अलग-अलग बहाने बनाकर पीड़ितों से ऑनलाइन भुगतान कराते थे।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी अब तक 100 से अधिक विदेशी नागरिकों से ठगी कर चुके हैं। हालांकि, ठगी की कुल रकम का अभी आधिकारिक आकलन नहीं हो सका है। बरामद डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच के बाद इस संबंध में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, एक हेडफोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा 5,200 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों में साइबर ठगी से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
जांच एजेंसियां अब बरामद लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। इसके साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों, सहयोगियों, वित्तीय लेनदेन और ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।