>उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री व जीएसटी काउंसिल के सदस्य सुरेश कुमार खन्ना ने जीएसटी सुधारों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि दरों में कमी से राजस्व में शुरुआती गिरावट ज़रूर दिख सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती देगा।
>वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पैसे कमाना नहीं, बल्कि जनता की संतुष्टि है। जीएसटी सुधारों से वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ेगी, उद्योगों को रफ्तार मिलेगी और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित होंगे।
>अगस्त माह में उत्तर प्रदेश सरकार को मुख्य कर और करेत्तर राजस्व से 16,575.70 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 606.05 करोड़ रुपये अधिक है। वर्ष 2024-25 के अगस्त में यह राशि 15,969.65 करोड़ रुपये थी।
>अगस्त में राजस्व का ब्योरा
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जीएसटी से – 6,611.59 करोड़ रुपये
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वैट से – 2,659.95 करोड़ रुपये
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आबकारी से – 3,754.43 करोड़ रुपये
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स्टांप व निबंधन से – 2,538.00 करोड़ रुपये
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परिवहन से – 786.87 करोड़ रुपये
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खनन से – 224.86 करोड़ रुपये
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>खनन को छोड़ सभी मदों में राजस्व वृद्धि दर्ज हुई।
>वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश ने कभी भी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM) की सीमा का उल्लंघन नहीं किया। राज्य का कर्ज सीमा तीन प्रतिशत है, जबकि इसे 2.97 प्रतिशत तक ही रखा गया है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने 53 हजार करोड़ रुपये ब्याज चुकाया था, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 60 हजार करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
>सुरेश खन्ना ने बताया कि जीएसटी काउंसिल की 11 घंटे लंबी बैठक में यूपी सरकार के प्रस्तावों को स्वीकार किया गया। विलासिता की वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाने और नशाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए गए। सभी राज्यों ने इन सुधारों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
>उन्होंने कहा, “जीएसटी सुधार आम जनता के हित में सरकार का बड़ा कदम है। शुरुआती झटके डराने वाले हो सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में ये सुधार राज्य की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देंगे।”