हापुड़ की राजनीति में बड़ा बदलाव, बसपा से निष्कासित पालिका अध्यक्ष पुष्पा देवी ने थामा भाजपा का दामन

02 Aug 2026

हापुड़ की स्थानीय राजनीति में रविवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष पुष्पा देवी ने अपने पति श्रीपाल सिंह और कई सभासदों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह घटनाक्रम जिले की राजनीतिक गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा की सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पुष्पा देवी, श्रीपाल सिंह और उनके साथ शामिल हुए नेताओं एवं सभासदों को पार्टी का पटका पहनाकर औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल कराया। कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

यह खबर भी पढ़े - 1090 चौराहे से निकला 60 बाइकर्स का कारवां, अब रोमांच के नक्शे पर चमकेगा कालिंजर किला?

पुष्पा देवी के साथ कई सभासदों के भाजपा में शामिल होने से हापुड़ की स्थानीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। नगर पालिका परिषद की निर्वाचित अध्यक्ष होने के कारण पुष्पा देवी का स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनके दल बदलने को केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि स्थानीय निकाय की राजनीति से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

यह खबर भी पढ़े - गाजियाबाद में आज से बदलेगा ट्रैफिक का रूट, कांवड़ यात्रा के चलते इन रास्तों पर रहेगा डायवर्जन

भाजपा के सदस्यता कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी नए सदस्यों का स्वागत किया। पार्टी की ओर से उन्हें औपचारिक सदस्यता दिलाई गई। कार्यक्रम के दौरान भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नए सदस्यों का स्वागत किया।

पुष्पा देवी पहले बहुजन समाज पार्टी से जुड़ी थीं और नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुई थीं। बसपा से निष्कासन के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। रविवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया।

नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष और उनके समर्थक सभासदों के भाजपा में शामिल होने के बाद हापुड़ के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों की नई राजनीतिक स्थिति आने वाले समय में जिले की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इसका राजनीतिक असर किस रूप में सामने आएगा, यह भविष्य की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

इस घटनाक्रम के बाद अब तक अन्य राजनीतिक दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि आने वाले दिनों में जिले की राजनीति पर इस बदलाव का क्या प्रभाव पड़ता है।