दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ के दक्षिण-पश्चिमी रेंज ने 2008 में दर्ज जबरन वसूली के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहे घोषित अपराधी हरि सिंह शेखावत को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, शेखावत के खिलाफ थाना विशेष प्रकोष्ठ में दर्ज मामले में जबरन वसूली, धमकी और उससे संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
पुलिस के मुताबिक, अदालत ने लगातार पेश नहीं होने के कारण हरि सिंह शेखावत को 2 अप्रैल 2016 को घोषित अपराधी घोषित किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना ठिकाना बदला और पहले गुजरात तथा बाद में राजस्थान में रहने लगा। एक महीने से अधिक समय तक की गई निगरानी और सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस को उसके जयपुर में छिपे होने की जानकारी मिली, जिसके बाद विशेष टीम ने वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया।
मामला प्राथमिकी संख्या 12/2008 से जुड़ा है, जो 15 मार्च 2008 को दर्ज की गई थी। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 384, 389, 506 और 511 लगाई गई थीं। मामला विशेष प्रकोष्ठ थाने में दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, घटना उस समय की है जब हरि सिंह शेखावत एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कपड़ा कंपनी में काम करता था। आरोप है कि उसने कंपनी से धन वसूलने का प्रयास किया था। इसी मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई और बाद में कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान शेखावत लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, इसी वजह से अदालत ने उसके खिलाफ घोषित अपराधी की कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, हरि सिंह शेखावत की लगातार अनुपस्थिति के बाद अदालत ने 2 अप्रैल 2016 को उसे घोषित अपराधी घोषित किया था। इसके बाद वह पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा।
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पुलिस का कहना है कि आरोपी ने जानबूझकर अपना ठिकाना बदला ताकि कानूनी कार्रवाई से बच सके। जांच के दौरान यह सामने आया कि वह पहले गुजरात गया और बाद में राजस्थान में रहने लगा। इस दौरान उसके ठिकाने की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने मानव निगरानी और अन्य स्रोतों का इस्तेमाल किया।
विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, लंबित और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दक्षिण-पश्चिमी रेंज की एक टीम बनाई गई थी। इस टीम का नेतृत्व निरीक्षक सुंदीप यादव और निरीक्षक नीरज कुमार ने किया, जबकि सहायक पुलिस आयुक्त पिरान चंद्र पंत की निगरानी में अभियान चलाया गया।
पुलिस के मुताबिक, टीम ने ऐसे आरोपियों पर लगातार निगरानी बढ़ाई थी जो पुराने मामलों में गिरफ्तारी से बच रहे थे। हरि सिंह शेखावत के मामले में भी एक महीने से अधिक समय तक उसके संभावित ठिकानों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई।
जांच के दौरान पुलिस को यह पता चला कि उसने पहले गुजरात में अपना आधार बनाया था और बाद में राजस्थान चला गया। इसी क्रम में जयपुर में उसके छिपे होने की सूचना सामने आई।
पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को टीम को विश्वसनीय सूचना मिली कि मामले का फरार आरोपी जयपुर में छिपा हुआ है और गिरफ्तारी से बच रहा है। सूचना मिलने के बाद तत्काल एक अलग छापेमारी टीम गठित कर जयपुर भेजी गई।
इस टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक राकेश ने किया। टीम में उपनिरीक्षक विशाल तिवारी, हेड कांस्टेबल नवीन चिल्लर, हेड कांस्टेबल नवीन शर्मा और हेड कांस्टेबल कुलदीप शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, जयपुर पहुंचने के बाद टीम ने व्यापक स्तर पर तलाशी और निगरानी की। जांच के दौरान आरोपी की मौजूदगी एक आवासीय सोसायटी में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने वहां कार्रवाई करते हुए हरि सिंह शेखावत को हिरासत में लिया और कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, हरि सिंह शेखावत ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए समय के साथ अपना ठिकाना बदल लिया था। जांच में उसके गुजरात जाने और बाद में राजस्थान में रहने की जानकारी सामने आई।
इस वजह से उसकी तलाश एक ही स्थान तक सीमित नहीं रही। दिल्ली में दर्ज पुराने मामले में कार्रवाई के लिए पुलिस को अलग-अलग राज्यों में उसकी मौजूदगी की जानकारी जुटानी पड़ी। दक्षिण-पश्चिमी रेंज की टीम ने इसी क्रम में मानव निगरानी के जरिए उसके संभावित ठिकानों पर काम किया। पुलिस का कहना है कि लगातार जानकारी एकत्र करने के बाद जयपुर में उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई और 13 अगस्त को टीम ने गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी की।
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, हरि सिंह शेखावत की उम्र 72 वर्ष है और वह भंवर सिंह शेखावत का पुत्र है। उसका पता वॉटल अर्बन वुड्स, वाटिका, अजमेर रोड, जयपुर, राजस्थान बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, शेखावत ने एक्सएलआरआई से स्नातक की पढ़ाई की है और उसने कई प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम किया है। वर्ष 2008 में जिस मामले में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, उस समय भी वह संबंधित कपड़ा कंपनी में काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इसी अवधि में कंपनी से धन वसूलने के प्रयास का मामला सामने आया था।
प्राथमिकी संख्या 12/2008 में भारतीय दंड संहिता की धारा 384, 389, 506 और 511 के तहत मामला दर्ज किया गया था। धारा 384 जबरन वसूली से संबंधित है, जबकि धारा 389 भय दिखाकर जबरन वसूली करने के उद्देश्य से आरोप लगाने से जुड़ी है। धारा 506 आपराधिक धमकी और धारा 511 अपराध के प्रयास से संबंधित है।
इस मामले में आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम निर्धारण अदालत की कार्यवाही के अनुसार होगा। पुलिस की कार्रवाई गिरफ्तारी और लंबित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
हरि सिंह शेखावत की गिरफ्तारी उस अभियान का हिस्सा बताई गई है जिसमें विशेष प्रकोष्ठ लंबे समय से फरार और लंबित मामलों से जुड़े आरोपियों की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी रेंज की टीम ने ऐसे लोगों की पहचान और निगरानी पर काम किया है जो पुराने मामलों में कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हैं। इस कार्रवाई में मानव निगरानी को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।
शेखावत के मामले में भी पुलिस ने उसके अलग-अलग राज्यों में स्थान बदलने की जानकारी जुटाई। बाद में जयपुर में उसकी मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद टीम ने वहां जाकर कार्रवाई की।