>होम्योपैथी निदेशालय में मृतक आश्रित कोटे से हुई नियुक्तियों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच आयुष मिशन की निदेशक डॉ. निशा अनंत को सौंपी गई है दरअसल, विधायक शहजिल इस्लाम अंसारी ने सितंबर 2023 में विधानसभा में सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि 2022 में विभागीय अधिकारियों ने मृतक आश्रित भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं की थीं। इस पर बनी आश्वासन समिति ने जवाबदेही तय करने के लिए नई जांच के आदेश दिए हैं।
>इससे पहले तत्कालीन सीडीओ लखनऊ की जांच में भी कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक:-
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कर्मचारी बिसन लाल की मौत के लगभग 30 साल बाद उनकी बेटी को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी दे दी गई, जबकि नियमों के अनुसार आवेदन अधिकतम 5 साल में होना चाहिए।
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कर्मचारी पुत्तू लाल के आश्रित का दस्तावेज संदिग्ध पाया गया।
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एक अन्य नियुक्ति में पद सृजन को लेकर भी गंभीर गड़बड़ी दर्ज हुई।
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>फिर भी, सीडीओ की रिपोर्ट आने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी।
>अब 26 अगस्त को हुई आश्वासन समिति की बैठक में मामले को फिर से गंभीरता से उठाया गया और आयुष निदेशक को जांच सौंपने का निर्णय लिया गया हालांकि, इस पर आयुष मिशन की निदेशक डॉ. निशा अनंत का कहना है कि उन्हें अभी तक जांच संबंधी कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।