दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में 31 वर्षीय एमएससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। छात्र की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली में अन्य छात्रों का प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा। गुरुवार, 27 अगस्त की देर रात सैकड़ों छात्रों ने ऋषिकेश के परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर परिसर में फ्लैश मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आईआईटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और ‘शर्म करो-शर्म करो’ के नारे लगाए।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में मामले की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदारी तय करना और ऋषिकेश के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देना शामिल है। छात्र यह भी मांग कर रहे हैं कि ऋषिकेश की मां की ओर से संस्थान के स्टाफ और अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच की जाए।
ऋषिकेश की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। गुरुवार देर रात निकाले गए फ्लैश मार्च में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। छात्रों ने संस्थान प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और मामले की जांच तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, मामले की जांच स्वतंत्र तरीके से होनी चाहिए। इसके साथ ही वे ऋषिकेश की मां द्वारा स्टाफ और अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने परिवार के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग भी रखी है।
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मामले को लेकर परिसर में छात्रों का विरोध उस समय सामने आया जब 22 अगस्त को संस्थान के परिसर में एक इमारत से गिरने के बाद 31 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। इसके बाद छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शन के चलते संस्थान प्रशासन ने सोमवार को कक्षाएं स्थगित करने का आदेश भी दिया था।
छात्रों के प्रदर्शन के बीच आईआईटी दिल्ली ने ऋषिकेश की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए गठित बाहरी जांच समिति का पुनर्गठन किया है। नई समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता करेंगी। समिति के पुनर्गठन की जानकारी उस घटनाक्रम के एक दिन बाद सामने आई, जब समिति के अध्यक्ष नियुक्त किए गए उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए समिति से खुद को अलग कर लिया था।
इसके बाद नई बाहरी जांच समिति गठित की गई है। समिति में न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता अध्यक्ष के तौर पर शामिल हैं। इसके अलावा एम्स-नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शरण भी समिति के सदस्य हैं। नई समिति में दो छात्र प्रतिनिधियों और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार को भी शामिल किया गया है। इससे पहले आईआईटी दिल्ली ने मंगलवार को छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था।
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उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ऋषिकेश ने 22 अगस्त को आईआईटी दिल्ली परिसर की एक इमारत से कथित तौर पर छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। प्रारंभिक जांच के अनुसार, छात्र 22 अगस्त की सुबह करीब आठ बजे संस्थान के मुख्य गेट से परिसर में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स पहुंचा। जानकारी के मुताबिक उसने लिफ्ट से छठी मंजिल तक की दूरी तय की और फिर इमारत के सामने की ओर से कथित तौर पर छलांग लगा दी।
घटना के बाद छात्र को तत्काल संस्थान के परिसर में स्थित अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। इसके बाद प्रशासन ने सोमवार को कक्षाएं स्थगित करने का आदेश दिया था।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। पुलिस की कार्रवाई के बीच संस्थान की ओर से छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए बाहरी समिति बनाई गई थी। जांच समिति के गठन का उद्देश्य छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करना है। समिति में बदलाव पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के व्यक्तिगत कारणों से समिति से अलग होने के बाद किया गया।
अब पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता करेंगी। समिति में चिकित्सा और मनोचिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ के साथ छात्र प्रतिनिधि और संस्थान के रजिस्ट्रार को भी शामिल किया गया है। ऋषिकेश की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कई मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख स्वतंत्र जांच और मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग है। छात्र ऋषिकेश के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा छात्र ऋषिकेश की मां द्वारा आईआईटी के स्टाफ और अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने इन मांगों को लेकर संस्थान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। गुरुवार देर रात निकाला गया फ्लैश मार्च इसी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था। इसमें सैकड़ों छात्रों ने भाग लिया और ऋषिकेश के परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई।