आईआईटी दिल्ली छात्र मौत की जांच अब पूर्व जज मुक्ता गुप्ता की अगुवाई में

27 Aug 2026

आईआईटी दिल्ली ने 31 वर्षीय एमएससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए गठित समिति का पुनर्गठन किया है। दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को नई जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह बदलाव उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के समिति के अध्यक्ष पद से व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अलग होने के बाद किया गया है।

छात्र की मौत के मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने घटनास्थल से मिले छात्र के मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। साथ ही आईआईटी दिल्ली से छात्र के काउंसलिंग रिकॉर्ड सहित अन्य संबंधित जानकारी मांगी गई है।

आईआईटी दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई जांच समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता करेंगी। समिति में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शरण को सदस्य बनाया गया है।

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इसके अलावा समिति में दो छात्र प्रतिनिधियों और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार को भी शामिल किया गया है। इस तरह नई समिति में न्यायिक, चिकित्सकीय, छात्र प्रतिनिधित्व और संस्थागत प्रशासन से जुड़े सदस्य शामिल हैं।

संस्थान ने मंगलवार को ऋषिकेश कुमार की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। बाद में समिति की अध्यक्षता में बदलाव किया गया।

जांच समिति के गठन के बाद इसके अध्यक्ष बनाए गए उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अध्यक्ष पद से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद आईआईटी दिल्ली ने समिति का पुनर्गठन करते हुए मुक्ता गुप्ता को इसकी नई अध्यक्षता सौंपी।

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समिति का उद्देश्य छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संस्थान ने मामले की जांच के लिए बाहरी जांच व्यवस्था बनाए रखने के साथ समिति में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सदस्यों को शामिल किया है।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ऋषिकेश कुमार सुबह करीब आठ बजे आईआईटी दिल्ली के मुख्य द्वार से परिसर में दाखिल हुए थे। इसके बाद वह लेक्चर हॉल परिसर पहुंचे।

बताया गया है कि छात्र लिफ्ट से छठी मंजिल पर गए, जहां से नीचे गिरने की घटना हुई। इसके बाद उन्हें आईआईटी दिल्ली के संस्थानिक अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच के तहत छात्र के मोबाइल फोन को कब्जे में लिया गया है। पुलिस ने संस्थान से छात्र से संबंधित काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य जानकारी भी मांगी है।

छात्र की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के चलते प्रशासन ने सोमवार को कक्षाएं स्थगित कर दी थीं। घटना के बाद परिसर में छात्रों की ओर से मामले की जांच और संस्थान में छात्र सहायता व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए। इस दौरान प्रशासन की ओर से मामले से संबंधित जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और बाहरी जांच समिति का पुनर्गठन किया गया।

आईआईटी दिल्ली ने विद्यार्थियों के कल्याण को संस्थान की प्राथमिकता बताया है। संस्थान के अनुसार, 2025 में नए पाठ्यक्रम लागू किए जाने के बाद प्रथम सेमेस्टर का क्रेडिट लोड कम किया गया है।

संस्थान ने प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए लाइफ स्किल्स पाठ्यक्रम भी जोड़े हैं। इसके अलावा प्रथम वर्ष की कक्षाओं में छात्रों की संख्या 30 से 60 तक सीमित किए जाने की जानकारी दी गई है। आईआईटी दिल्ली के अनुसार, विद्यार्थियों के लिए मेंटरशिप, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था को भी मजबूत करने के कदम उठाए गए हैं।

नई समिति की संरचना में पूर्व न्यायाधीश, मनोचिकित्सा विशेषज्ञ, छात्र प्रतिनिधि और संस्थान के रजिस्ट्रार को शामिल किया गया है। इसके जरिए छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए अलग-अलग पक्षों को समिति का हिस्सा बनाया गया है।

समिति के अध्यक्ष के रूप में मुक्ता गुप्ता की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब परिसर में घटना के बाद छात्रों का प्रदर्शन हुआ और पुलिस स्तर पर भी जांच जारी है। मामले में पुलिस की जांच और संस्थान की जांच समिति की प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर जारी है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के साथ छात्र से जुड़ी उपलब्ध जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की है, जबकि संस्थान की समिति छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच करेगी।