देश में आज से इनकम टैक्स से जुड़े कई नए नियम लागू हो गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा बजट 2026 के तहत किए गए इन बदलावों का सीधा असर आम करदाताओं और निवेशकों पर पड़ेगा। हालांकि कुछ बदलावों से लागत में बढ़ोतरी भी देखी जा सकती है।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर बढ़ा टैक्स बोझ - शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए लागत बढ़ गई है। सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में वृद्धि की है।
- फ्यूचर सौदों पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया है।
- ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
इस बदलाव के बाद डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग पहले की तुलना में महंगी हो जाएगी।
ITR भरने की डेडलाइन में बदलाव - सरकार ने कुछ श्रेणी के करदाताओं को रिटर्न फाइल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है।
- जिन करदाताओं का ऑडिट नहीं होता, उनके लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की अंतिम तिथि 31 अगस्त कर दी गई है (पहले 31 जुलाई)।
- ITR-1 और ITR-2 के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही बनी रहेगी।
TCS दरों में संशोधन - टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स की दरों में भी बदलाव किया गया है, जिससे कुछ सेक्टर्स में लागत बढ़ सकती है।
- शराब की बिक्री पर TCS 1% से बढ़ाकर 2%
- स्क्रैप पर TCS 1% से बढ़ाकर 2%
- कोयला और आयरन ओर जैसे खनिजों पर 2% TCS लागू
विदेश खर्च पर TCS में राहत - विदेश यात्रा और अन्य खर्चों के मामले में सरकार ने राहत दी है।
- LRS के तहत विदेश यात्रा पैकेज पर अब एक समान 2% TCS लागू होगा (पहले 5% और 20% की अलग-अलग दरें थीं)।
- विदेश में शिक्षा और इलाज के लिए भेजी जाने वाली राशि पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो गया है, जिससे 1961 से लागू पुराना कानून समाप्त हो गया है। हालांकि करदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने इस नए कानून के तहत कानूनी भाषा को सरल बनाने और प्रक्रियाओं को सहज बनाने पर जोर दिया है, ताकि आम लोगों के लिए टैक्स नियमों को समझना आसान हो सके।