>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल आयात जारी रखने के कारण 25% का अतिरिक्त टैरिफ थोप दिया है। इस फैसले से भारत पर कुल टैरिफ दर 50% तक पहुँच गई है। ट्रंप का तर्क है कि रूस से तेल खरीदकर भारत अप्रत्यक्ष रूप से मास्को को युद्ध में मदद कर रहा है। लेकिन इस पूरी बहस के बीच एक अहम तथ्य को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है यूक्रेन, जिसे अमेरिका आर्थिक और सैन्य मदद दे रहा है, वही देश आज भारत के डीजल पर भारी मात्रा में निर्भर है।
>जुलाई 2025 में भारत यूक्रेन का सबसे बड़ा डीजल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा। इसी अवधि में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर भारी टैरिफ लागू किया। लेकिन इसके बावजूद यूक्रेन ने भारत से जमकर डीजल खरीद जारी रखी। ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह विडंबना स्पष्ट करती है कि अमेरिका की नीति में बड़ा विरोधाभास मौजूद है।
>यूक्रेनी ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म नैफ्टोरिनोक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में यूक्रेन के डीजल आयात में भारत की हिस्सेदारी 15.5% रही। औसतन भारत से प्रतिदिन करीब 2,700 टन डीजल शिपमेंट गया। यह इस साल भारत के सबसे बड़े मासिक निर्यात आँकड़ों में शामिल है।
>जनवरी से जुलाई 2025 के बीच, यूक्रेन की डीजल आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी 10.2% रही, जबकि 2024 की इसी अवधि में यह केवल 1.9% थी। डीजल की आपूर्ति रोमानिया से डेन्यूब नदी के मार्ग और तुर्की के ओपीईटी टर्मिनल के जरिए यूक्रेन तक पहुँचाई गई।
>भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ट्रंप प्रशासन भारत को रूस के करीब दिखाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, यूक्रेन की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को चलाने में सबसे बड़ा सहारा भारतीय डीजल ही बना हुआ है। जुलाई में यूक्रेन के अन्य आपूर्तिकर्ताओं में स्लोवाकिया (15%), ग्रीस (13.5%), तुर्की (12.4%) और लिथुआनिया (11.4%) शामिल थे, लेकिन भारत का निर्यात सबसे तेज गति से बढ़ा।
>भारत के डीजल निर्यात ने न केवल वैश्विक ऊर्जा समीकरण बदल दिए हैं बल्कि यह भी दिखाया है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद हिंदुस्तान की ऊर्जा कूटनीति मजबूती से आगे बढ़ रही है। सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन यूक्रेन की इस "भारतीय ईंधन निर्भरता" को नज़रअंदाज़ करता रहेगा या अपनी कथित नोबेल नीति पर पुनर्विचार करेगा।