वैश्विक अनिश्चितताओं और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। वर्ल्ड बैंक ने भारत के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ा दिया है, जिससे आर्थिक मोर्चे पर राहत की उम्मीद जगी है।
हाल ही में जारी रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जिओपोलिटिकल टेंशन्स और आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और नीतिगत स्थिरता इस वृद्धि के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखा जा रहा है, खासकर ऊर्जा कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर। इसके बावजूद वर्ल्ड बैंक का मानना है कि भारत दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्तंभ बना रहेगा। आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था की विविधता और आर्थिक नीतियों की मजबूती उसे बाहरी झटकों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रखती है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि निजी निवेश में सुधार और सरकारी खर्च में वृद्धि से आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा। इसके अलावा, सेवा क्षेत्र और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन भी वृद्धि को सहारा दे सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, फिर भी भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर वैश्विक संस्थानों का भरोसा कायम है। वर्ल्ड बैंक द्वारा अनुमान में की गई यह बढ़ोतरी इसी विश्वास को दर्शाती है।