जंतर-मंतर वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस का दावा, एआई से बना था वीडियो

06 Oct 2026

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार से बदसलूकी के आरोपों से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने अब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने वीडियो की सत्यता और उसके निर्माण से संबंधित जांच के बारे में जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, वायरल वीडियो एआई तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया गया था। जांच के दौरान हरियाणा के पलवल निवासी नदीम का नाम सामने आने की बात पुलिस ने कही है। मामले में पुलिस ने उसके सोशल मीडिया गतिविधियों और मोबाइल में मौजूद एआई टूल्स की भी जांच की जानकारी दी है।

3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस के एक एसीपी पर महिला पत्रकार से बदसलूकी के आरोप लगाए गए थे। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को फर्जी बताया है। पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वायरल वीडियो को एआई जनरेटेड बताया और इसके निर्माण से संबंधित जांच की जानकारी सार्वजनिक की। पुलिस के अनुसार, वीडियो को तैयार करने में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मामले की जांच के दौरान हरियाणा के पलवल निवासी नदीम का नाम सामने आया। पुलिस ने बताया कि नदीम साकेत के एक मदरसे में पढ़ता था और वह 10वीं कक्षा में असफल रहा था। पुलिस के अनुसार, उसने 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के समय ही 'न्यूज आईना टुडे' नाम से इंस्टाग्राम पेज बनाया था। पुलिस का दावा है कि इस खाते से अब तक सीजेपी के समर्थन में करीब 1200 पोस्ट किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, इन पोस्ट में दिल्ली पुलिस और सरकार के खिलाफ सामग्री भी शामिल थी।

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दिल्ली पुलिस ने नदीम के सोशल मीडिया खाते और उसकी पोस्ट की गतिविधियों की जांच की बात कही है। पुलिस के अनुसार, संबंधित इंस्टाग्राम खाते पर बड़ी संख्या में पोस्ट किए गए थे। इनमें सीजेपी के समर्थन के साथ दिल्ली पुलिस और सरकार के खिलाफ सामग्री होने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन पोस्ट की पूरी सूची, उनकी तारीखें या किसी स्वतंत्र जांच संस्था की रिपोर्ट का विवरण नहीं दिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जांच के दौरान नदीम जैसे कई अन्य इंस्टाग्राम हैंडल्स की भी पहचान की गई है। पुलिस के अनुसार, ये हैंडल्स पुलिस और सरकार के खिलाफ फर्जी वीडियो तैयार कर विभिन्न इंटरनेट मंचों पर पोस्ट कर रहे थे। पुलिस ने इन गतिविधियों को लेकर जांच जारी होने की जानकारी दी है। पुलिस का कहना है कि इन वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों के माध्यम से माहौल खराब करने की कोशिश किए जाने की जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, नदीम की ओर से बनाए गए वीडियो का उद्देश्य दिल्ली में वर्ष 2020 जैसी दंगा स्थिति पैदा करना और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना था। हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया दावा है। उपलब्ध जानकारी में इस उद्देश्य को लेकर किसी न्यायिक निष्कर्ष या स्वतंत्र जांच रिपोर्ट का विवरण नहीं दिया गया है। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी रहने की बात कही है।

दिल्ली पुलिस ने नदीम के संभावित विदेशी संपर्कों के बारे में भी जांच किए जाने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, उसके विदेशी संपर्कों के बारे में पता लगाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी में किसी विदेशी व्यक्ति, संस्था या देश के साथ उसके संपर्क का कोई विशिष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल इस पहलू को पुलिस की जांच के दायरे में बताया गया है।

पुलिस के अनुसार, नदीम के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कई एआई टूल्स मिले हैं। पुलिस ने इन टूल्स को महंगा बताया है। अब जांच इस बिंदु पर भी की जा रही है कि ये एआई टूल्स कैसे खरीदे गए और उनके लिए पैसे की व्यवस्था कहां से हुई। पुलिस इन डिजिटल संसाधनों की खरीद और भुगतान से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, मोबाइल में मौजूद एआई टूल्स की कीमत और उनकी खरीद की प्रक्रिया भी जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संबंधित टूल्स किस माध्यम से खरीदे गए और उनके लिए भुगतान किस स्रोत से किया गया। उपलब्ध जानकारी में किसी भुगतान स्रोत, बैंक खाते या लेनदेन की पुष्टि नहीं की गई है।

मामले में जांच का एक प्रमुख हिस्सा सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने वायरल वीडियो को एआई जनरेटेड बताया है। एआई तकनीक के इस्तेमाल से तैयार किए गए वीडियो वास्तविक घटनाओं जैसे दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मामलों में वीडियो के स्रोत, निर्माण और प्रसार की जांच महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में पुलिस ने वीडियो से जुड़े व्यक्ति और अन्य सोशल मीडिया खातों की पहचान किए जाने की बात कही है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार से बदसलूकी के आरोप एक एसीपी पर लगाए गए थे। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को फर्जी बताया है। पुलिस ने आरोपों से जुड़े वायरल वीडियो को अपनी जांच में एआई जनरेटेड बताया है। उपलब्ध सामग्री में संबंधित एसीपी का नाम या महिला पत्रकार का नाम नहीं दिया गया है। इसलिए इस रिपोर्ट में इनकी पहचान से संबंधित कोई अतिरिक्त जानकारी शामिल नहीं की गई है।

दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जांच में कई पहलुओं को शामिल किया गया है। इनमें वायरल वीडियो का निर्माण, वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की पहचान, सोशल मीडिया खातों की गतिविधियां, मोबाइल में मौजूद एआई टूल्स, इन टूल्स की खरीद और भुगतान का स्रोत तथा संभावित विदेशी संपर्क शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी पहलुओं पर जांच जारी रहने की जानकारी दी है।