लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के लखनऊ जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई। ED की टीम ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ली।
यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा बताया गया है। जांच का प्रमुख हिस्सा सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के कथित डायवर्जन और उसके इस्तेमाल से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी यह पता लगाने की प्रक्रिया में है कि सरकारी ठेकों से मिली रकम को निजी ठेकेदारों के जरिए डायवर्ट किया गया या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो उस रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियां बनाने में किया गया या नहीं।
ED की तलाशी के दौरान अपराध से अर्जित रकम से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर भी फोकस रहा। इसके साथ ही कुछ ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच हुए वित्तीय लेनदेन को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
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ED के लखनऊ जोनल ऑफिस की ओर से पीएमएलए की धारा 17 के तहत कुल 10 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ये ठिकाने उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के अलावा दिल्ली में स्थित बताए गए हैं।
तलाशी अभियान के जरिए जांच एजेंसी ने ऐसे दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की, जिनसे मामले में सामने आए वित्तीय लेनदेन और रकम के कथित प्रवाह की जानकारी मिल सके। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई का उद्देश्य अपराध से अर्जित रकम से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री को हासिल करना भी था।
जांच का भौगोलिक दायरा तीन शहरों तक होने के कारण ED की कार्रवाई में अलग-अलग स्थानों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शामिल रही। रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में तलाशी के जरिए मामले से संबंधित अलग-अलग दस्तावेजों और साक्ष्यों को एकत्र करने पर जोर दिया गया।
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ED की कार्रवाई का संबंध मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से बताया गया है। जांच एजेंसी इन संस्थाओं से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से संबंधित गतिविधियों की जांच कर रही है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामला केवल सामान्य वित्तीय लेनदेन की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के कथित डायवर्जन पर भी केंद्रित है। जांच में यह पहलू शामिल है कि सरकारी ठेकों की रकम निजी ठेकेदारों के जरिए डायवर्ट की गई थी या नहीं।
इसी के साथ उस रकम के संभावित इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, ED इस पहलू की जांच कर रही है कि डायवर्ट की गई रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने में किया गया था या नहीं।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण जांच बिंदुओं में सरकारी ठेकों की रकम शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोप है कि सरकारी ठेकों से मिलने वाली रकम को निजी ठेकेदारों के माध्यम से डायवर्ट किया गया।
ED की तलाशी इसी कथित वित्तीय प्रवाह को समझने से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाने के लिए भी की गई। जांच एजेंसी यह देखने की प्रक्रिया में है कि ठेकों से जुड़ी धनराशि का प्रवाह किस तरह हुआ और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष ठेके की रकम, कुल राशि, संबंधित ठेकेदारों के नाम या किसी व्यक्ति की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इन पहलुओं पर कोई अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संभव नहीं है।
ED की कार्रवाई में कुछ ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी यह जांच कर रही है कि इन लेनदेन का मामले में कथित धन के डायवर्जन से क्या संबंध है।
वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज किसी भी जांच में धन के प्रवाह को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस मामले में भी ED की तलाशी के दौरान ऐसे रिकॉर्ड और साक्ष्य जुटाने पर ध्यान दिया गया, जिनसे ट्रस्ट और संबंधित ठेकेदारों के बीच धन के लेनदेन की जानकारी मिल सके।
उपलब्ध सामग्री में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन लेनदेन की कितनी राशि जांच में शामिल है। इसी तरह, किसी विशिष्ट लेनदेन को अवैध ठहराए जाने या किसी व्यक्ति पर अंतिम रूप से जिम्मेदारी तय किए जाने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।
जांच का एक अन्य प्रमुख पहलू ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियां हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से डायवर्ट की गई सरकारी ठेकों की रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने में किया गया या नहीं।
इस जांच के तहत संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। तलाशी अभियान के जरिए ED ऐसे ही रिकॉर्ड जुटाने की कार्रवाई कर रही है, जो रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल के बीच संभावित संबंध की जानकारी दे सकें। यह पूरा पहलू जांच एजेंसी के उस सवाल से जुड़ा है कि सरकारी ठेकों से संबंधित रकम का कथित प्रवाह किस माध्यम से हुआ और वह किस उद्देश्य से इस्तेमाल की गई।
ED ने तलाशी के दौरान अपराध से अर्जित रकम से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की। डिजिटल साक्ष्य में मामले से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि तलाशी के दौरान किस प्रकार के विशिष्ट डिजिटल उपकरण या रिकॉर्ड मिले।
इसी तरह, तलाशी से बरामद रकम की कोई निश्चित राशि भी उपलब्ध सूचना में नहीं दी गई है। जांच एजेंसी की कार्रवाई का उद्देश्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कथित धन के स्रोत, उसके हस्तांतरण और उसके उपयोग से जुड़े तथ्यों को सामने लाना बताया गया है।
पूरी कार्रवाई से स्पष्ट है कि ED की जांच का प्रमुख फोकस वित्तीय प्रवाह पर है। एक ओर सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम और उसके कथित डायवर्जन की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर निजी ठेकेदारों तथा ट्रस्ट के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
इसके साथ ही, ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियों के निर्माण में कथित रूप से इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत की जांच भी की जा रही है। इन सभी पहलुओं को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित धनराशि का वास्तविक वित्तीय प्रवाह क्या रहा।
इस मामले में ED की तलाशी उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी हुई। तीन अलग-अलग शहरों में तलाशी का उद्देश्य मामले से जुड़े विभिन्न ठिकानों से दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाना रहा।
रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी और इससे जुड़े मामले के संदर्भ में महत्वपूर्ण स्थान है, जबकि सहारनपुर और दिल्ली में की गई तलाशी मामले से जुड़े अन्य ठिकानों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के दायरे को दर्शाती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में तलाशी लिए गए प्रत्येक ठिकाने की पहचान, वहां मिले दस्तावेजों का विस्तृत विवरण या किसी बरामदगी की कुल मात्रा का उल्लेख नहीं है।