मिडिल ईस्ट तनाव का असर एयरलाइंस पर - महंगा हुआ हवाई सफर, जेट फ्यूल की कीमत हुई दोगुनी

14 May 2026

इमेज सोर्स (एआई)

 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब आम यात्रियों की जेब तक पहुंचने लगा है। जेट फ्यूल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद एयरलाइंस कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बन गया है। हालात ऐसे हैं कि आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई किराए में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। सिंगापुर एयरलाइन्स ने स्वीकार किया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी हैं। एयरलाइन के अनुसार बढ़ती ईंधन लागत अब परिचालन खर्च पर सीधा असर डाल रही है, जिससे एयर फेयर में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।

 

भारत में भी इसका असर एयर इंडिया पर साफ दिखाई दे रहा है। एयर इंडिया इस समय एक साथ कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट, मिडिल ईस्ट के कई हवाई क्षेत्रों पर प्रतिबंध, खाड़ी देशों में परिचालन प्रभावित होना और जेट फ्यूल की बेतहाशा बढ़ती कीमतें शामिल हैं। एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि कई उड़ानों को अब लंबा रूट लेकर संचालित करना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और लागत दोनों बढ़ गई हैं। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में संचालन प्रभावित होने से कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

 

सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा है कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एयर इंडिया को मौजूदा संकट से उबारने में सहयोग कर रही है। एयर इंडिया के फ्लीट अपग्रेड और नए विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया भी जारी है। इस बीच यात्रियों के लिए एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। सिंगापुर एयरलाइंस और एयर इंडिया ने अपनी कोडशेयर साझेदारी का विस्तार करते हुए 4 मई 2026 से 21 नए रूट जोड़ने का ऐलान किया है। इनमें एक घरेलू और 20 अंतरराष्ट्रीय रूट शामिल हैं। दोनों एयरलाइंस अब मिलकर 27 देशों के 82 शहरों तक सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

 

हालांकि बढ़ती लागत एयरलाइंस कंपनियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। सिंगापुर एयरलाइंस ने बताया कि इस वर्ष उसने रिकॉर्ड 4 करोड़ 24 लाख यात्रियों को सेवा दी, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद कंपनी ने माना कि किरायों में बढ़ोतरी के बाद भी जेट फ्यूल के बढ़े हुए खर्च की पूरी भरपाई नहीं हो पा रही है।

 

सिंगापुर एयरलाइंस की बजट एयरलाइन स्कूट ने भी टिकट कीमतों में बढ़ोतरी की है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और लंबे समय तक बना रहता है तो ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर इसका और गहरा असर पड़ सकता है। इसी बीच एयर इंडिया ने जून से अगस्त 2026 के बीच अपने कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों की संख्या घटाने और कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। कंपनी ने इसके पीछे ईंधन की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों और कुछ देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने को प्रमुख वजह बताया है।