नई दिल्ली। जेएनयू में उमर खालिद की किताब के विमोचन और उस पर प्रस्तावित चर्चा कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी दिवस के मौके पर किया जाना प्रस्तावित था। कार्यक्रम की बुकिंग रद्द होने की जानकारी सामने आने के बाद छात्र जेएनयू परिसर में स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-2 (SSS-2) के पास एकत्र हुए और प्रशासन के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कार्यक्रम रद्द किए जाने का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रशासन पर दबाव आया, जिसके बाद ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी गई। उन्होंने एबीवीपी की ओर से लगातार धमकियां मिलने का भी आरोप लगाया है।
दिए गए विवरण के मुताबिक, आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड के आदिवासियों से संबंधित एक किताब पर चर्चा आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। यह किताब उमर खालिद के जेएनयू में किए गए शोध कार्य से संबंधित बताई गई है। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा के अनुसार, इस कार्यक्रम की घोषणा पहले की गई थी। इसके बाद कार्यक्रम के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग की गई। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम को देखते हुए ऑडिटोरियम बुक किया गया था। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बुकिंग रद्द कर दी गई। इसके बाद छात्रों ने कैंपस में विरोध शुरू किया।
जेएनयू प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा ने कार्यक्रम रद्द किए जाने को लेकर प्रशासन पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी दिवस के मौके पर झारखंड के आदिवासियों पर लिखी गई उमर खालिद की किताब पर चर्चा आयोजित करने की घोषणा की गई थी।
उन्होंने कहा, "पिछले दिनों हमने यह ऐलान किया था कि आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में हम झारखंड के आदिवासियों पर लिखी हुई, हमारी ही यूनिवर्सिटी के एक छात्र उमर खालिद की किताब—जो उनका थीसिस था और इसी जेएनयू से पास हुआ था तथा अब किताब में तब्दील हो चुका है—पर एक चर्चा कराएंगे।"
अदिति मिश्रा ने आगे आरोप लगाया कि कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रशासन पर दबाव आया और ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी गई।
उनके मुताबिक, "इसके बाद ऊपर से भारी दबाव आया और प्रशासन ने ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी। हालांकि हमने पहले ऑडिटोरियम की बुकिंग नहीं की थी, लेकिन बरसात का मौसम होने के कारण हमने बुकिंग की थी, जिसे बाद में कैंसल कर दिया गया। हमें एबीवीपी की तरफ से भी लगातार धमकियां मिल रही हैं।"
ये आरोप छात्र संघ की अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में जेएनयू प्रशासन या एबीवीपी की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
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ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द होने के बाद छात्र जेएनयू परिसर में एकत्र हुए। छात्रों ने कार्यक्रम को अनुमति नहीं दिए जाने के फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी देखने को मिली। छात्र SSS-2 के पास जुटे और प्रशासन के निर्णय के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई। मामले के बाद विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुरक्षा के मद्देनजर एहतियाती इंतजाम किए गए हैं।
प्रस्तावित कार्यक्रम में उमर खालिद की किताब पर चर्चा की जानी थी। अदिति मिश्रा के बयान के अनुसार, यह किताब झारखंड के आदिवासियों से संबंधित उनके शोध कार्य से जुड़ी है और उनके जेएनयू के शोध को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किए जाने के बाद उस पर चर्चा का कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य और इसमें शामिल होने वाले अन्य वक्ताओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई सामग्री में नहीं दी गई है। इसलिए इस संबंध में अतिरिक्त जानकारी को तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
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इस पूरे मामले में मुख्य घटनाक्रम कार्यक्रम की अनुमति या ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द किया जाना है। छात्र संघ की अध्यक्ष का कहना है कि पहले कार्यक्रम की घोषणा की गई और बाद में ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी गई। छात्रों ने इसी फैसले के खिलाफ परिसर में विरोध किया। दूसरी ओर, उपलब्ध सामग्री में जेएनयू प्रशासन की ओर से बुकिंग रद्द करने की वजह का कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। इसी तरह, एबीवीपी की ओर से कथित धमकियों के आरोपों पर भी उपलब्ध जानकारी में संगठन की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने अपने बयान में एबीवीपी की ओर से लगातार धमकियां मिलने का आरोप लगाया है। यह आरोप छात्र संघ की अध्यक्ष की ओर से लगाया गया है और उपलब्ध जानकारी में इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र दस्तावेज या एबीवीपी की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और एबीवीपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
कार्यक्रम रद्द होने के बाद छात्रों के विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के लिहाज से प्रशासनिक निगरानी रखी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में किसी छात्र के घायल होने, गिरफ्तारी या किसी अन्य अप्रिय घटना की जानकारी नहीं दी गई है।