ताहिर हुसैन सिर्फ 'एक्टर' थे? कपिल मिश्रा बोले- कानून अब 'डायरेक्टरों' तक भी पहुंचेगा

14 Jul 2026

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ताहिर हुसैन केवल "एक्टर" थे और कानून के हाथ उन "डायरेक्टरों" तक भी पहुंचेंगे, जिन्होंने कथित तौर पर पूरी साजिश तैयार की थी।

कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा सुनियोजित थी और इसका उद्देश्य सड़कों को बंद कर व्यापक हिंसा फैलाना था। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल घटनास्थल पर मौजूद लोगों तक ही जांच सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कथित रूप से पर्दे के पीछे भूमिका निभाने वाले लोगों तक भी कानून पहुंचेगा।

भाजपा नेता ने दावा किया कि दंगों के दौरान सड़कें बंद करने वालों को तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने आरोप लगाया कि दंगों के पीछे काम करने वाले लोगों की भूमिका भी सामने आएगी और कानून उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेगा।

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हालांकि, कपिल मिश्रा ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अदालत ने ताहिर हुसैन के खिलाफ फैसला सुनाया है।

दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान भारतीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में ताहिर हुसैन के खिलाफ लगाए गए आपराधिक साजिश के आरोप को स्वीकार नहीं किया और उस आरोप से उन्हें राहत दी।

 

ताहिर हुसैन केवल एक्टर, डायरेक्टर कौन?

केजरीवाल और गैंग के हाथ हिंदुओं के खून से रंगे हुए हैं

केजरीवाल से पांच सवाल :

CM के रूप में केजरीवाल ने अंकित शर्मा जी की हत्या पर दो शब्द क्यों नहीं बोलें?

संजय सिंह ने ताहिर हुसैन को बार बार बेगुनाह क्यों बताया ?

जिन लोगों ने… pic.twitter.com/Pe5lEcGiFC

— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) July 14, 2026

 

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। कई मकानों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा था।

इसी हिंसा के दौरान भारतीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या हुई थी, जो इस पूरे प्रकरण के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रही। अदालत की ओर से हत्या के मामले में सुनाई गई दोषसिद्धि को इस मामले की महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई माना जा रहा है।

कपिल मिश्रा के आरोपों के बीच आम आदमी पार्टी ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा है कि वर्ष 2020 में ही ताहिर हुसैन को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। पार्टी का कहना है कि उसके बाद से ताहिर हुसैन का आम आदमी पार्टी से कोई संबंध नहीं है।