>वाराणसी में काशी-तमिल संगमम की शुरुआत हो गई है, जिसमें काशी और तमिलनाडु की प्राचीन संस्कृति, भाषा और ज्ञान परंपराओं को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
>यह चौथा वर्ष है जब वाराणसी इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। इस बार आयोजन का केंद्र बिंदु ‘लेट्स लर्न तमिल करकलम’ कार्यक्रम है, जिसके तहत तमिल भाषा और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने की पहल की गई है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में 50 हिंदी जानने वाले तमिल अध्यापक तैनात किए जाएंगे, जिन्हें सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रत्येक अध्यापक 30 छात्रों के बैच के साथ स्पोकेन तमिल मॉडल चलाएंगे, जिससे कुल 1500 छात्र तमिल सीखेंगे।
>कार्यक्रम के अंतर्गत 300 छात्र 2 दिसंबर से 10 बैचों में तमिलनाडु पहुंचेंगे, जहां उन्हें स्थानीय संस्कृति, भाषा और विरासत से सीधे परिचित होने का अवसर मिलेगा। अगस्त्य अभियान के माध्यम से दोनों परंपराओं के गहरे सांस्कृतिक संबंधों को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन का समापन रामेश्वरम में किया जाएगा।
>जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और आयोजन में विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका रहेगी, जिसका उद्देश्य काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।