केदारनाथ का 'डुप्लीकेट' बना पायेगा? अखिलेश यादव के मंदिर पर बवाल

18 Jul 2025

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा इटावा में बनवाए जा रहे 'केदारेश्वर मंदिर' को लेकर एक बड़ा धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों और चारधाम महापंचायत ने इसे "हिंदू आस्था और धार्मिक परंपराओं का अपमान" बताया है और मंदिर के नाम, डिज़ाइन व रंगरूप में बदलाव की मांग की है।

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उत्तराखंड से उठी तीखी आपत्ति

चारधाम महापंचायत के उपाध्यक्ष और केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने साफ शब्दों में कहा कि केदारनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का जीवंत प्रतीक है। ऐसे में उसकी प्रतिलिपि बनाना न केवल धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह परंपराओं का घोर उल्लंघन भी है।

तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि इटावा में बन रहा 'केदारेश्वर मंदिर' पूरी तरह केदारनाथ मंदिर की हूबहू प्रतिकृति है — चाहे वह नाम हो, वास्तुशिल्प हो, रंग हो या आकार।

बीकेटीसी की चुप्पी और अखिलेश पर तीखा हमला

चारधाम महापंचायत ने बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) की निष्क्रियता पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति केवल राजस्व पर केंद्रित है और श्रद्धालुओं की सुविधाओं व धार्मिक गरिमा की रक्षा में पूरी तरह विफल रही है।

साथ ही तीर्थ पुरोहितों ने यह भी सवाल उठाया कि अखिलेश यादव ने कभी केदारनाथ धाम की यात्रा नहीं की, बावजूद इसके वह वहां की आस्था का प्रतीक अपने राज्य में राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर रहे हैं, जो सर्वथा अस्वीकार्य है।

आंदोलन की चेतावनी

तीर्थ पुरोहितों ने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मंदिर का नाम, डिज़ाइन और स्वरूप नहीं बदला गया तो वे राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे, और अखिलेश यादव के आवास के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।

इससे पहले भी दिल्ली में जब एक मंदिर को केदारनाथ की तर्ज पर बनाया गया था, तो तीव्र विरोध के बाद निर्माण कार्य रोकना पड़ा था। तीर्थ पुरोहितों ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में धार्मिक परंपराओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।