>उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों महागठबंधन बनाम भाजपा के बीच आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग पर साजिश रचने के आरोप लगाने के बाद अब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा है कि आगामी चुनावों में महागठबंधन को पहले पश्चिम बंगाल और फिर उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना करना पड़ेगा।
>उपमुख्यमंत्री मौर्य ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखे पोस्ट में कहा कि बिहार चुनाव में महागठबंधन की करारी शिकस्त ने उनके भविष्य की दिशा तय कर दी है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि बिहार चुनाव के दौरान खुद गोता लगाने के साथ राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव को भी अपने साथ ले डूबा और महागठबंधन की दिशा स्पष्ट कर दी। अब अगला नंबर ममता दीदी और फिर अखिलेश यादव का है।
>ज्ञात हो कि बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत NDA ने दो-तिहाई बहुमत प्राप्त कर इंडिया गठबंधन को पीछे छोड़ दिया था। मौर्य के अनुसार इसी राजनीतिक संकेत से स्पष्ट है कि महागठबंधन की राह आगे भी कठिन रहने वाली है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को प्रेस वार्ता में दावा किया कि भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर उन विधानसभा क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण के बहाने 50,000 से अधिक वोट काटने की तैयारी कर रहे हैं, जहाँ सपा और इंडिया गठबंधन को 2024 लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी।
>अखिलेश का आरोप है कि इन इलाकों में मतदाता सूचियों में हेरफेर कर भाजपा विपक्षी दलों के वोट कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा, हम निर्वाचन आयोग पर विश्वास रखते हैं, लेकिन सुनने में आ रहा है कि भाजपा और आयोग 2024 की हार से बौखलाकर सबसे ज्यादा यूपी और बंगाल पर ध्यान दे रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी की है। उन्होंने मांग की कि आयोग इन शिकायतों का तुरंत संज्ञान लेकर निष्पक्षता सुनिश्चित करे।
>एक तरफ अखिलेश यादव वोट कटने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केशव प्रसाद मौर्य इसे झूठ का पुलिंदा बताते हुए महागठबंधन की हार तय मान रहे हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में यूपी और बंगाल की राजनीति में बेहद गर्माहट देखने को मिलेगी और दोनों पक्ष चुनावी मोर्चे पर कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते।