लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट्स (आईएससीबी) एक्सीलेंस अवार्ड फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट इन मेडिकल साइंसेज से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट्स तथा आईएससीबी रिसर्च फाउंडेशन की ओर से प्रदान किया गया है।
यह पुरस्कार चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाले महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है। डॉ. सूर्यकान्त को अब तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की विभिन्न संस्थाओं से 231 पुरस्कार मिल चुके हैं और आईएससीबी का यह सम्मान उनका 232वां पुरस्कार बताया गया है।

डॉ. सूर्यकान्त केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग से पिछले 30 वर्षों से चिकित्सा शिक्षक के रूप में जुड़े हैं। वे 21 वर्षों से प्रोफेसर और 15 वर्षों से विभागाध्यक्ष के पद पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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उनका कार्य मुख्य रूप से रेस्पिरेटरी मेडिसिन और उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा, शोध तथा मरीजों की देखभाल से संबंधित रहा है। वे टीबी, अस्थमा, एलर्जी, लंग कैंसर और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से जुड़े विषयों पर भी लंबे समय से काम कर रहे हैं।
डॉ. सूर्यकान्त के चिकित्सा विज्ञान से संबंधित विषयों पर 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा एलर्जी, अस्थमा, टीबी और कैंसर के क्षेत्र में उनके 1000 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
उनके नाम दो अंतरराष्ट्रीय पेटेंट भी हैं। इसके अलावा उन्होंने करीब 250 एमडी और पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है तथा 50 से अधिक शोध परियोजनाओं का निर्देशन किया है। उन्हें 22 फैलोशिप और 22 ओरेशन अवार्ड मिलने की जानकारी भी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।
आईएससीबी एक्सीलेंस अवार्ड फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट इन मेडिकल साइंसेज चिकित्सा विज्ञान में योगदान के लिए प्रदान किया गया है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. अनामिक शाह और राष्ट्रीय सचिव डॉ. पीएमएस चौहान ने डॉ. सूर्यकान्त को पुरस्कार के लिए बधाई दी है। आईएससीबी के पदाधिकारियों ने डॉ. सूर्यकान्त से संस्था को भी अपना मार्गदर्शन प्रदान करने की अपेक्षा व्यक्त की है।
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इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट्स की स्थापना वर्ष 1995 में लखनऊ स्थित सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में की गई थी। संस्था का उद्देश्य रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के क्षेत्र में अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देना बताया गया है। वर्तमान में संस्था से करीब 1,800 सदस्य जुड़े होने की जानकारी दी गई है। इनमें शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी संगठनों और उद्योग जगत से जुड़े लोग शामिल हैं।
आईएससीबी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, वैज्ञानिक व्याख्यानों तथा शोध गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य करती है। संस्था की ओर से वैज्ञानिक योगदान के लिए विभिन्न पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। आईएससीबी रिसर्च फाउंडेशन शोध, नवाचार, वैज्ञानिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम करता है।
पुरस्कार मिलने के बाद डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, केजीएमयू तथा उन सभी सहयोगियों और शोधकर्ताओं के प्रयासों का सम्मान है, जिन्होंने चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में निरंतर सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें मरीजों की बेहतर सेवा, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे और अधिक काम करने के लिए प्रेरित करेगा।
डॉ. सूर्यकान्त पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से लेखों, वार्ताओं, टेलीविजन, रेडियो, इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को टीबी, अस्थमा, एलर्जी, लंग कैंसर तथा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों की रोकथाम और उपचार के बारे में जागरूक करते रहे हैं। वे समय-समय पर आम लोगों के लिए टीबी और अन्य श्वसन रोगों से संबंधित लेख, वार्ता और वीडियो के माध्यम से भी जागरूकता गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
डॉ. सूर्यकान्त की दो हिंदी पुस्तकों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें ‘टीबी’ और ‘आस्थमा में योग की भूमिका’ शामिल हैं। नई शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी हिंदी की 100 पुस्तकों के विमोचन में डॉ. सूर्यकान्त की ये दोनों पुस्तकें भी शामिल थीं।
डॉ. सूर्यकान्त वर्तमान में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष होने के साथ केजीएमयू की कार्य परिषद के सदस्य भी हैं। वे एम्स भुवनेश्वर की गवर्निंग बॉडी तथा उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, सैफई, इटावा की एकेडमिक काउंसिल के सदस्य हैं। वे पूर्व में लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद तथा उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की कार्य परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं।
इसके अलावा वे एम्स पटना की संस्थान एवं गवर्निंग बॉडी और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, जयपुर के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य एवं स्टैंडिंग सेलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
डॉ. सूर्यकान्त वैज्ञानिक समिति, वैश्विक रोगाणुरोधी प्रतिरोध मीडिया एलायंस-गामा के सह-अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट टीबी एंड लंग डिजीज की आईडीईएफईटीई टीबी परियोजना के तहत स्थापित ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर एवं पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर के प्रभारी हैं। यह उत्तर प्रदेश में पहला सार्वजनिक केंद्र है। वे स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर सोसाइटी तथा पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं।
डॉ. सूर्यकान्त आर्गेनाइजेशन फॉर कंजर्वेशन ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचर के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के उत्तरी क्षेत्र कार्यबल के अध्यक्ष भी बताए गए हैं। यह कार्यबल भारत के नौ राज्यों से संबंधित है। इसके अलावा वे डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन की राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्य हैं।
वे इंडियन चेस्ट सोसाइटी, इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी और नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
डॉ. सूर्यकान्त इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश आईएमए एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशलिटीज के चेयरमैन रह चुके हैं। इसके अलावा वे आईएमए-एएमएस के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वे इंडियन स्टडी अगेंस्ट स्मोकिंग के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं।
उनकी उपलब्धियों में चिकित्सा शिक्षा, शोध, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, शोध परियोजनाओं का निर्देशन, पुस्तक लेखन और श्वसन रोगों को लेकर जनजागरूकता गतिविधियों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। आईएससीबी एक्सीलेंस अवार्ड फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट इन मेडिकल साइंसेज को मिलाकर उनके पुरस्कारों की संख्या 232 होने की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।