केजीएमयू में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन, 12 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग

22 Aug 2026

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल इंटर्न ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने मौजूदा 12 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किए जाने की मांग उठाई। डॉक्टरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।

प्रदर्शन के दौरान केजीएमयू परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। एहतियात के तौर पर मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग रहा।

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में ड्यूटी करनी पड़ती है। मरीजों की देखभाल, वार्ड में काम, क्लिनिकल ड्यूटी और इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां भी इंटर्नशिप के दौरान निभानी पड़ती हैं।

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डॉक्टरों का कहना है कि इन जिम्मेदारियों और मौजूदा ड्यूटी व्यवस्था को देखते हुए 12 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने स्टाइपेंड को 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी है। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि वर्तमान स्टाइपेंड में पर्याप्त बढ़ोतरी की जरूरत है।

केजीएमयू परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। किसी अप्रिय स्थिति की आशंका को देखते हुए मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन का केंद्र स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग रही। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने पर जोर दिया।

केजीएमयू में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग इससे पहले भी सामने आ चुकी है। 11 अगस्त को अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 300 एमबीबीएस इंटर्न और छात्रों ने केजीएमयू के प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन किया था।

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उस दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने 12 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग उठाई थी। छात्रों ने इंटर्नशिप के दौरान लंबी ड्यूटी और मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारियों का हवाला दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रोफेसरों ने भी छात्रों की मांग का समर्थन किया था। इससे स्पष्ट है कि केजीएमयू में इंटर्न और छात्रों से जुड़ा स्टाइपेंड का मुद्दा पहले भी प्रशासन के सामने उठाया जा चुका है।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार, इंटर्नशिप केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अस्पताल में नियमित चिकित्सकीय जिम्मेदारियों से भी जुड़ी होती है। उन्होंने मरीजों की देखभाल, वार्ड ड्यूटी, क्लिनिकल कार्य और इमरजेंसी सेवाओं में जिम्मेदारियां निभाने का उल्लेख किया।

इसी आधार पर डॉक्टरों ने मौजूदा स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की है। उनकी मांग का मुख्य बिंदु 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना है। डॉक्टरों ने यह भी मांग रखी कि इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी तथा जिम्मेदारियों के अनुरूप भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है। यहां बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुविधा को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर ध्यान रहा।

उपलब्ध सामग्री में यह जानकारी नहीं दी गई है कि प्रदर्शन की वजह से अस्पताल की नियमित चिकित्सा सेवाओं पर कितना प्रभाव पड़ा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन का मुख्य विषय स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग था।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें मौजूदा स्टाइपेंड में बढ़ोतरी से जुड़ी हैं। इनमें 12 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड बढ़ाना, इसे 30 हजार रुपये प्रतिमाह करना और इंटर्न व जूनियर डॉक्टरों की जिम्मेदारियों के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा डॉक्टरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

केजीएमयू की आधिकारिक वेबसाइट पर रेजिडेंट डॉक्टरों से संबंधित भर्ती तथा स्टाइपेंड और वेतन संरचना से जुड़े नोटिस उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त को केजीएमयू की आधिकारिक वेबसाइट पर नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट का परिणाम जारी किया गया था। इसके बाद 19 अगस्त को वरिष्ठ रेजिडेंट भर्ती से संबंधित अपडेट भी जारी हुआ था।

रेजिडेंट डॉक्टरों से जुड़ी ये प्रक्रियाएं केजीएमयू की संस्थागत और चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसे में डॉक्टरों और मेडिकल इंटर्न से जुड़े भुगतान तथा सेवा संबंधी मुद्दे भी प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाते रहे हैं।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने अपनी मांग विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखी है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग दोहराई है। उपलब्ध जानकारी में केजीएमयू प्रशासन की ओर से 30 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

फिलहाल डॉक्टरों की मुख्य मांग मौजूदा 12 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये करना है। प्रदर्शन के जरिए इसी मांग को प्रशासन तक पहुंचाया गया है।